अपनी तूफानी रफ्तार से बल्लेबाजों में खौफ पैदा करने वाले मयंक यादव एक बार फिर टीम इंडिया की जर्सी में नजर आने वाले हैं. इस युवा तेज गेंदबाज को इस महीने जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है. 24 साल के मयंक अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार टीम इंडिया के टी20 स्क्वॉड में लौटे हैं. करीब 21 महीने बाद हुई यह वापसी उनके करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.
मयंक यादव के टैलेंट पर कभी सवाल नहीं उठे, लेकिन उनकी फिटनेस लगातार चिंता का सबब बनी हुई है. पिछले तीन साल में चोटों ने उन्हें बार-बार मैदान से बाहर किया है. एक समय 150 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी कर सनसनी मचाने वाले मयंक को क्रिकेट के मैदान से ज्यादा समय रिहैब में बिताना पड़ा है. अब चयनकर्ताओं ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है. जिम्बाब्वे सीरीज उनके लिए टीम इंडिया में अपनी जगह मजबूत करने का बड़ा मौका साबित हो सकती है.
तीनों मुकाबले खेलेंगे मयंक यादव?
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मयंक यादव को टी20 क्रिकेट खेलने के लिए फिट घोषित किया गया है. अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति चाहती है कि मयंक को जिम्बाब्वे के खिलाफ पूरी सीरीज में मौका मिले. चयनकर्ता मयंक को उसी तरह लगातार मौके देना चाहते हैं, जिस तरह अफगानिस्तान के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में गुरनूर बरार को दिए गए. माना जा रहा है कि मयंक जिम्बाब्वे के खिलाफ तीनों टी20I मुकाबलों में खेल सकते हैं. हालांकि, इस सीरीज के दौरान चयनकर्ताओं की नजरें सिर्फ उनके प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि फिटनेस और वर्कलोड पर भी रहने वाली हैं.
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मयंक यादव की वापसी को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन हाल के महीनों में उन्हें ज्यादा मैच खेलने का मौका नहीं मिला है. 2026 की शुरुआत से उन्होंने सिर्फ छह टी20I मुकाबलों में हिस्सा लिया है. इनमें टी20 वर्ल्ड कप के दो वॉर्म अप मैच और IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 के मुकाबले शामिल हैं. इस दौरान मयंक सिर्फ चार विकेट हासिल कर सके. आईपीेल 2026 में भी उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. वह महंगे साबित हुए और तीन बार 50 या उससे ज्यादा रन खर्च किए, जबकि विकेट हासिल करने के लिए भी संघर्ष करते नजर आए.
इसके अलावा मयंक यादव की रफ्तार को लेकर भी सवाल उठे. चोट से वापसी के बाद वह पहले की तरह लगातार 150 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी करते नजर नहीं आए हैं. ऐसे में जिम्बाब्वे दौरे पर सभी की नजरें इस बात पर भी होगी कि क्या मयंक अपनी पुरानी रफ्तार हासिल कर पाते हैं या नहीं.
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मयंक यादव ने अक्टूबर 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया था. उन्होंने तीन मैचों में चार विकेट लेकर अपनी छाप छोड़ी थी. हालांकि, इंटरनेशनल क्रिकेट में शानदार शुरुआत के कुछ समय बाद ही वह एक बार फिर चोटिल हो गए. इसके बाद उन्हें लंबे समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा. आईपीएल 2025 में उन्होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन सिर्फ दो मैच खेलने के बाद चोट ने एक बार फिर उनके करियर पर ब्रेक लगा दिया.
इंजरी का साथ नहीं छूट रहा...
मयंक यादव के छोटे से क्रिकेट करियर में चोटों की लंबी फेहरिस्त रही है. 2023 में हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण वह पूरे सीजन मैदान से बाहर रहे थे. 2024 में उन्होंने शानदार वापसी की और अपनी तूफानी रफ्तार से क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी. मयंक को भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा तेज गेंदबाज माना जाने लगा था. लेकिन इसी दौरान साइड स्ट्रेन की समस्या ने उनकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया. भारत के लिए डेब्यू करने के कुछ समय बाद उनकी पीठ के निचले हिस्से में लम्बर स्ट्रेस इंजरी की समस्या सामने आई. उनकी आईपीएल 2025 में वापसी भी सिर्फ दो मुकाबलों तक सीमित रही. चोट की समस्या दोबारा उभरने के बाद मयंक को फिर मैदान से दूर होना पड़ा. 2025 के मध्य में उन्होंने क्राइस्टचर्च में सर्जरी भी कराई.
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जिम्बाब्वे सीरीज में मयंक यादव के पास अपनी दावेदारी मजबूत करने का शानदार मौका है. तेज गेंदबाजों अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा को इस दौरे से आराम दिया गया है, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा भी टीम में शामिल नहीं हैं. ऐसे में मयंक यादव को प्रिंस यादव और अशोक शर्मा के साथ भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है. अगर मयंक जिम्बाब्वे के खिलाफ विकेट हासिल करने के साथ अपनी फिटनेस और रफ्तार साबित करने में सफल रहते हैं तो भविष्य की भारतीय टी20 टीम के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं.
जिम्बाब्वे टूर मयंक यादव के लिए सिर्फ टीम इंडिया में वापसी नहीं, बल्कि अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने का मौका है. चयनकर्ताओं ने उन पर फिर भरोसा जताया है और अब मयंक के सामने खुद को साबित करने की चुनौती होगी. जिम्बाब्वे में उनके विकेटों से ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि क्या उनका शरीर लगातार क्रिकेट का दबाव झेल पाता है. अगर चोट ने एक बार फिर उनका रास्ता रोका तो टैलेंट और रफ्तार के बावजूद आगे की राह मुश्किल हो सकती है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क