बुंदेलखंड क्षेत्र में एक बार फिर केन बेतवा परियोजना के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. स्थानीय लोग अपने विस्थापन और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं. बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और गांवों पर असर को लेकर आदिवासी और किसान संगठित होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं और ‘चिता आंदोलन’ कर रहे हैं.