उत्तर भारत में इस साल गर्मी 25 मई से 2 जून तक चरम पर रहेगी. इस समय को नौतपा के नाम से जाना जाता है. हर साल नौतपा की तारीख बदलती रहती है. इन नौ दिनों में सूरज इतना तेज चमकता है कि दिन के समय सड़कें भट्टी की तरह तपती हैं. रात में भी उमस से नींद नहीं आती. मौसम विभाग भी इन दिनों में हीटवेव की चेतावनी जारी करता है. लेकिन आखिर यह नौतपा होता क्यों है? इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं?
नौतपा शब्द संस्कृत के दो शब्दों 'नव' और 'तप' से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है- नौ दिन की तपिश. यह उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे इलाकों में प्रचलित एक पारंपरिक शब्द है. इन दिनों में तापमान अक्सर 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.
सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि हवा में नमी (उमस) भी बढ़ जाती है, जिससे शरीर का पसीना सूखता नहीं और गर्मी और भी असहनीय हो जाती है. इन दिनों में लू और अंधड़ भी आते हैं.
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सूरज की स्थिति सबसे बड़ा कारण
नौतपा के पीछे सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण सूरज की स्थिति है. पृथ्वी 23.5 डिग्री झुकी हुई है. मई के अंत और जून के शुरू में सूरज कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के ठीक ऊपर आ जाता है. इस समय उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं. भारत के मैदानी इलाकों पर सूरज की रोशनी सबसे ज्यादा ताकत से पहुंचती है.
दिन भी सबसे लंबे हो जाते हैं. सुबह जल्दी उगने वाला सूरज शाम को देर से ढलता है. नतीजा यह होता है कि जमीन पूरे दिन भारी मात्रा में गर्मी सोख लेती है. रात में भी गर्मी धीरे-धीरे निकलती है, जिससे रातें भी गर्म रहती हैं. यही वजह है कि इन दिनों तापमान रात में भी 30-35 डिग्री के आसपास रह जाता है.
सूखी जमीन और गर्म हवाएं
लंबी गर्मी से जमीन पूरी तरह सूख चुकी होती है. सूखी मिट्टी नमी नहीं रख पाती, इसलिए वह जल्दी गर्म होती है और जल्दी गर्मी छोड़ती भी है. पेड़-पौधे भी सूखे पड़े होते हैं, जिससे वातावरण में नमी और कम हो जाती है.
इसके साथ ही राजस्थान की तरफ से गर्म और सूखी पछुआ हवाएं (लू) चलती हैं. ये हवाएं रेगिस्तानी इलाकों से आती हैं. उत्तर भारत के मैदानों को और भी गर्म कर देती हैं. ऊंचे वायुमंडल में हवा नीचे की तरफ दबती रहती है, जिससे बादल नहीं बन पाते और बारिश की कोई उम्मीद नहीं रहती.
उमस क्यों बढ़ जाती है?
नौतपा में सिर्फ गर्मी ही नहीं, उमस भी लोगों को परेशान करती है. मानसून की तैयारी शुरू हो चुकी होती है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ने लगती हैं. इन हवाओं में पानी की भाप ज्यादा होती है, लेकिन अभी पूरी तरह बारिश नहीं होती.
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नतीजा यह होता है कि हवा में नमी बढ़ जाती है, लेकिन पसीना सूख नहीं पाता. वैज्ञानिक भाषा में इसे 'हीट इंडेक्स' कहते हैं. 45 डिग्री तापमान और 60-70 प्रतिशत ह्यूमेडिटी के साथ 'फील्स लाइक' तापमान 50-55 डिग्री तक महसूस हो सकता है. यही कारण है कि इन दिनों लोगों को थकान, चक्कर और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
उत्तर भारत का मैदानी इलाका तीन तरफ से पहाड़ों और एक तरफ समुद्र से घिरा है. गर्मी के मौसम में गर्म हवा ऊपर नहीं उठ पाती और नीचे ही घूमती रहती है. धूल भरी आंधियां (अंधड़) कभी-कभी आती हैं, जो कुछ देर के लिए तापमान गिराती हैं, लेकिन उमस बढ़ा देती हैं.
नौतपा के बाद राहत कब?
नौतपा के ठीक बाद ही दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंचता है और फिर धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता है. जब मानसून की पहली बारिश होती है, तो न सिर्फ तापमान गिरता है बल्कि जमीन भी ठंडी हो जाती है. यही वजह है कि नौतपा को 'गर्मी का चरम' माना जाता है.
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इन दिनों दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें. खूब पानी पिएं, घर में ओआरएस या नींबू पानी रखें. बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखें. हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और सिर ढककर निकलें. नौतपा प्रकृति का एक चक्र है जो हमें याद दिलाता है कि गर्मी के बाद बारिश जरूर आएगी. वैज्ञानिक कारण समझकर हम खुद को और अपने परिवार को बेहतर तरीके से बचा सकते हैं.
ऋचीक मिश्रा