बादलों से ऊपर नीले जेट्स और अल्ट्रावायलेट रिंग्स... अद्भुत नजारा देख दंग रह गए वैज्ञानिक

नासा ने अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) बादलों के ऊपर रंग-बिरंगी आतिशबाजी की तस्वीरें लीं. ये आतिशबाजी बादलों से नीचे नहीं बल्कि ऊपर अंतरिक्ष की तरफ हो रही थी. ये ट्रांजिएंट ल्यूमिनस इवेंट्स (TLEs) हैं – लाल स्प्राइट्स (उल्टे जेलीफिश जैसे), नीले जेट्स और अल्ट्रावायलेट रिंग्स. ये सिर्फ 10 मिलीसेकेंड के लिए रहते हैं. इसलिए इन्हें कैप्चर करना मुश्किल होता है.

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बादलों के ऊपर उठ रही आसमानी बिजली अंतरिक्ष तक जाती है. (Photo: NASA) बादलों के ऊपर उठ रही आसमानी बिजली अंतरिक्ष तक जाती है. (Photo: NASA)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर बैठे एस्ट्रोनॉट्स ने एक अनोखा नजारा देखा है. पृथ्वी पर हम सिर्फ बादल फटने की आवाज और बिजली की चमक देखते हैं, लेकिन बादलों से लगभग 90 किलोमीटर ऊपर पतली हवा में रंग-बिरंगे बिजली के फूल खिलते हैं. ये नीले जेट, लाल स्प्राइट्स, बैंगनी हेलो और अल्ट्रावायलेट रिंग्स हैं. इन्हें एक साथ ट्रांजिएंट ल्यूमिनस इवेंट्स (TLEs) कहते हैं. ये घटनाएं इतनी तेज होती हैं कि इन्हें देखना दुर्लभ होता है.  

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अंतरिक्ष स्टेशन पर लगी खास मशीन ASIM क्या कर रही है

अंतरिक्ष स्टेशन पर यूरोपियन स्पेस एजेंसी की मशीन ASIM (Atmosphere-Space Interactions Monitor) लगी हुई है. यह मशीन पृथ्वी को लगातार देखती है. बादलों के ऊपर होने वाली छोटी-छोटी बिजली की घटनाओं को रिकॉर्ड करती है. 

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इसमें हाई-स्पीड कैमरा और फोटोमीटर हैं जो नाखून जितनी छोटी चमक को भी पकड़ लेते हैं. ASIM ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया. इसने पता लगाया कि बादलों के ऊपरी हिस्से से बिजली निकलकर आयनोस्फियर (पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल) तक पहुंचती है. वहां अल्ट्रावायलेट रिंग (ELVES) बनाती है. ये रिंग सैकड़ों मील तक फैल जाती हैं. रेडियो सिग्नल बिगाड़ सकती हैं.

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रेड स्प्राइट्स – उल्टे जेलीफिश जैसे रहस्यमयी बिजली के फूल

रेड स्प्राइट्स सबसे अनोखी घटना है. ये 48-80 km बादलों के ऊपर अचानक दिखते हैं. ये उल्टे जेलीफिश की तरह लटकते हैं. सिर्फ 10 मिलीसेकंड तक रहते हैं. ज्यादातर लोग जिंदगी में कभी नहीं देख पाते. ये लाल रंग के होते हैं. बहुत तेज चमकते हैं. ASIM ने इनकी तस्वीरें और वीडियो ली हैं. 

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साथ ही ब्लू जेट्स भी दिखे जो बादलों से ऊपर की तरफ तीर की तरह निकलते हैं. ये इतनी तेज होती हैं कि जमीन से देखना मुश्किल था. अब अंतरिक्ष से इनकी ऊंचाई और स्पीड साफ मापी जा रही है.

ISS के एस्ट्रोनॉट्स कैपुला से तस्वीरें कैसे ले रहे हैं

अंतरिक्ष स्टेशन के कैपुला (सात खिड़कियों वाला ग्लास डोम) से एस्ट्रोनॉट्स खुद तस्वीरें ले रहे हैं. ESA का थॉर-डेविस प्रयोग इसी के लिए है. एस्ट्रोनॉट्स खिड़की के पीछे हाई-स्पीड कैमरा लगाते हैं. 1 लाख फ्रेम प्रति सेकंड की स्पीड से फिल्म बनाते हैं. 

ये स्लो-मोशन वीडियो दिखाते हैं कि बिजली कैसे शाखाओं में बंटती है. इससे वैज्ञानिकों को प्लाज्मा (बिजली का गर्म गैस) समझने में मदद मिल रही है. ये वीडियो पावर ग्रिड और एयरलाइंस को भी चेतावनी देने में काम आएंगे.

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अदृश्य खतरा – गामा रे फ्लैश और लाइट-1 क्यूबसैट

बिजली सिर्फ रोशनी नहीं देती, कभी-कभी गामा रे फ्लैश भी पैदा करती है. ये किरणें इतनी तेज होती हैं कि एयरलाइन में बैठे लोगों को एक सेकंड में सीने का एक्स-रे जितना रेडिएशन मिल जाता है. 

जापान स्पेस एजेंसी ने ISS से लाइट-1 नाम का छोटा क्यूबसैट छोड़ा है. यह ब्रेड के टुकड़े जितना छोटा है लेकिन हाई-एनर्जी फोटॉन पकड़ने में माहिर है. यह भूमध्य रेखा के तूफानों पर नजर रख रहा है. इससे वैज्ञानिक 3D नक्शा बना रहे हैं कि ये खतरे कहां ज्यादा होते हैं.

ये घटनाएं रेडियो, हवाई जहाज और मौसम पर कैसे असर डालती हैं

स्प्राइट्स और ELVES आयनोस्फियर में बिजली का बैलेंस बिगाड़ देते हैं. इससे रेडियो सिग्नल कमजोर हो जाते हैं और पनडुब्बियों तक मैसेज नहीं पहुंच पाते. एयरलाइंस अब इन जगहों को जानकर उड़ानें प्लान कर रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये घटनाएं ऊपरी वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओजोन को भी बदलती हैं. इससे मौसम और जलवायु मॉडल और सटीक बन रहे हैं.

भविष्य में क्या होगा

अंतरिक्ष स्टेशन अभी कई साल तक चलने वाला है. ASIM और नई मशीनें और ज्यादा तेजी से डेटा भेजेंगी. छोटे-छोटे क्यूबसैट्स का पूरा बेड़ा बन सकता है जो रीयल-टाइम अलर्ट देगा. नासा और ESA कहते हैं कि पृथ्वी के तूफानों को समझने के लिए कभी-कभी ऊपर से नीचे देखना पड़ता है. हर नई तस्वीर हमें बिजली के छिपे राजों के और करीब ले जा रही है.

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