हंतावायरस का नया चेहरा दिखा, क्रूज शिप पर इंसानों से इंसानों में फैलने की खबर

क्रूज शिप होंडियस पर हंतावायरस के इंफेक्शन ने हड़कंप मचा दिया है. डॉक्टर सहित कई लोगों के संक्रमित होने से इसके 'इंसान से इंसान' में फैलने की पुष्टि हुई है. 50% मृत्यु दर वाला यह वायरस अब चुनौती बन गया है.

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केप वर्डे में खड़े क्रूज शिप पर हंतावायरस अब इंसानों से इंसानों में फैलने लगा है. (Photo: Getty/AFP) केप वर्डे में खड़े क्रूज शिप पर हंतावायरस अब इंसानों से इंसानों में फैलने लगा है. (Photo: Getty/AFP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

आमतौर पर चूहे से फैलने वाला खतरनाक हंतावायरस (Hantavirus) अब एक नई और डरावनी शक्ल में सामने आया है. अर्जेंटीना से रवाना हुए एक क्रूज शिप एमवी होंडियस (MV Hondius) पर इस वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. अब तक इस जहाज पर सवार 6 यात्री गंभीर रूप से बीमार हुए हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है. 

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सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जहाज के डॉक्टर भी संक्रमित हो गए हैं, जिससे इस बात की प्रबल संभावना पैदा हो गई है कि यह वायरस अब इंसान से इंसान में फैल रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दुनिया भर के विशेषज्ञ अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटे हैं कि आखिर एक बंद जहाज पर यह संक्रमण कैसे फैला.

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क्या है एंडीज वायरस और यह कितना घातक है?

वैज्ञानिकों का प्रारंभिक अनुमान है कि यह हंतावायरस का एंडीज सबटाइप (Andes Virus) हो सकता है. आम तौर पर हंतावायरस संक्रमित चूहों के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है, लेकिन एंडीज वायरस दुनिया में हंतावायरस की इकलौती ऐसी प्रजाति है जिसमें इंसान से इंसान में फैलने के प्रमाण मिले हैं. 

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यह वायरस हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) पैदा करता है, जिसमें फेफड़ों में पानी भर जाता है. इंसान को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है. इसकी मृत्यु दर डरावनी है- संक्रमित होने वाले 50% लोगों की जान जा सकती है. जहाज पर जिस तरह से एक के बाद एक लोग बीमार पड़ रहे हैं, उसने विशेषज्ञों को 'इंसान से इंसान' में संक्रमण के सिद्धांत पर काम करने को मजबूर कर दिया है.

कैसे शुरू हुआ मौत का यह सिलसिला?

इस संकट की शुरुआत 1 अप्रैल को हुई जब जहाज अर्जेंटीना के उशुआया बंदरगाह से रवाना हुआ. 6 अप्रैल को एक 70 वर्षीय डच यात्री को बुखार आया और 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई. इसके बाद उसकी पत्नी की भी दक्षिण अफ्रीका में मौत हो गई. जल्द ही एक ब्रिटिश यात्री भी इसकी चपेट में आ गया. 

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जब दक्षिण अफ्रीका की संक्रामक रोग विशेषज्ञ लुसिल ब्लमबर्ग ने नमूनों की जांच की, तब जाकर इस बात की पुष्टि हुई कि यह हंतावायरस है. अब तक दो पुष्ट मामले और तीन मौतों के साथ, जहाज पर मौजूद 147 यात्रियों को क्वारंटीन कर दिया गया है. जहाज के डॉक्टर का बीमार होना इस बात का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है कि मरीजों की देखभाल के दौरान वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में पहुंचा है.

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शरीर पर हमला: जब फेफड़े पानी से भर जाते हैं

हंतावायरस का हमला बहुत ही खामोश और तेज होता है. शुरुआत में यह साधारण फ्लू जैसा लगता है- बुखार, बदन दर्द और कमजोरी. लेकिन अचानक मरीज की हालत बिगड़ने लगती है. वायरस खून की नसों (Blood Vessels) को लीकी यानी कमजोर बना देता है, जिससे तरल पदार्थ रिसकर फेफड़ों में जमा होने लगता है.

मरीज को लगता है जैसे वह हवा में होने के बावजूद डूब रहा हो. ऐसे समय में ECMO मशीन (जो फेफड़ों और हृदय का काम बाहरी रूप से करती है) ही जान बचा सकती है. चिली और अर्जेंटीना जैसे देशों में नियम है कि हंतावायरस के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत ऐसे केंद्र भेजा जाए जहां ECMO की सुविधा हो.

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क्या यह महामारी का रूप ले सकता है?

फिलहाल WHO इसे एक 'पब्लिक हेल्थ इवेंट' के रूप में देख रहा है, न कि व्यापक महामारी के रूप में. विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान से इंसान में इसका फैलाव बहुत करीबी संपर्क के बिना दुर्लभ है. हालांकि, क्रूज शिप जैसे बंद स्थान इस तरह के संक्रमण के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं.

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जहाज अब केप वर्डे के तट पर खड़ा है. इसे स्पेन के कैनरी द्वीप ले जाने की योजना है, जहां पूरी तरह से डिसइंफेक्शन और जांच की जाएगी. वैज्ञानिक अब वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग कर रहे हैं ताकि यह पक्का हो सके कि यह एंडीज वायरस ही है या कोई नया म्यूटेशन.

वैश्विक सहयोग और भविष्य की चुनौती

जहाज पर हंतावायरस का यह पहला दर्ज मामला है. इसने स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जैसे कि अंतरराष्ट्रीय पानी में जहाज पर क्वारंटीन के नियम क्या होने चाहिए. दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, नीदरलैंड और सेनेगल के वैज्ञानिक मिलकर इस पर काम कर रहे हैं. फिलहाल राहत की बात यह है कि यह कोरोना की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इसकी उच्च मृत्यु दर को देखते हुए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.

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