अंटार्कटिका के थ्वेट्स ग्लेशियर को 'डूम्सडे ग्लेशियर' (कयामत का ग्लेशियर) कहा जाता है. हाल के रिसर्च से पता चला है कि यह तेजी से कमजोर हो रहा है. अगर यह पूरी तरह ढह गया तो वैश्विक समुद्र स्तर में तुरंत 65 सेंटीमीटर (लगभग 2 फीट) तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो दुनिया के तटीय शहरों और द्वीपों के लिए बड़ा खतरा है. जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्म समुद्री पानी इस ग्लेशियर को अंदर से खोखला कर रहा है.
थ्वेट्स ग्लेशियर क्या है और क्यों है खतरनाक?
थ्वेट्स ग्लेशियर पश्चिमी अंटार्कटिका में है. फ्लोरिडा राज्य जितना बड़ा है (लगभग 129 km चौड़ा). यह दुनिया का सबसे चौड़ा ग्लेशियर है. यह वेस्ट अंटार्कटिक आइस शीट को रोककर रखता है, जैसे बोतल में कॉर्क. अगर थ्वेट्स ढह गया, तो पीछे की पूरी आइस शीट बह सकती है. जिससे समुद्र स्तर 3 मीटर (10 फीट) तक बढ़ सकता है. इससे पूरी दुनिया के तटीय शहरों को नुकसान होगा.
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अकेले थ्वेट्स में इतनी बर्फ है कि पिघलने पर समुद्र स्तर 65 सेंटीमीटर बढ़ेगा. पिछले 40 सालों में इसकी पिघलने की रफ्तार बहुत तेज हो गई है. हर साल 50 अरब टन बर्फ पिघल रही है.
सतह पर क्या हो रहा है: दरारें बढ़ रही हैं
2025 की एक नई स्टडी (इंटरनेशनल थ्वेट्स ग्लेशियर कोलैबोरेशन - ITGC) में 2002 से 2022 तक के सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया गया. थ्वेट्स ईस्टर्न आइस शेल्फ (TEIS) में एक महत्वपूर्ण 'शियर जोन' (जहां बर्फ अलग-अलग रफ्तार से बहती है) के आसपास दरारें तेजी से बढ़ी हैं.
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नीचे क्या हो रहा है: गर्म पानी से पिघलाव
ग्लेशियर के नीचे गर्म समुद्री पानी घुस रहा है. एक अलग स्टडी में पाया गया कि बड़े-बड़े एडीज (घूमते पानी के चक्र, 6 मील तक चौड़े) गर्म नमकीन पानी को बर्फ के नीचे धकेल रहे हैं. ये एडीज घंटों से दिनों में बर्फ पिघला रहे हैं. पिघलने से ठंडा मीठा पानी निकलता है, जो गर्म पानी से मिलकर और ज्यादा टर्बुलेंस पैदा करता है – एक खतरनाक फीडबैक लूप. ग्लेशियर की ग्राउंडिंग लाइन (जहां बर्फ जमीन से उठकर तैरने लगती है) तेजी से पीछे हट रही है.
कब तक ढहेगा और क्या असर होगा?
वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरा ढहना अगले कुछ दशकों में नहीं होगा, लेकिन 21वीं और 22वीं सदी में रफ्तार और तेज हो जाएगी। अगर वेस्ट अंटार्कटिक आइस शीट प्रभावित हुई, तो सदी के अंत तक समुद्र स्तर कई फीट बढ़ सकता है.
असर
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क्या किया जा सकता है?
वैज्ञानिक कहते हैं कि कार्बन उत्सर्जन तुरंत कम करना सबसे अच्छा तरीका है. अगर ग्लोबल वॉर्मिंग रोकी गई, तो बड़ा पिघलाव रोका या देरी की जा सकती है. लेकिन 2025 में फॉसिल फ्यूल उत्सर्जन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो चिंता की बात है. थ्वेट्स ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा संकेत है. अगर हमने अब नहीं संभाला, तो आने वाली पीढ़ियां भारी कीमत चुकाएंगी.
आजतक साइंस डेस्क