Vastu Tips For Mandir: वास्तु शास्त्र के अनुसार, खुली बालकनी में मंदिर या पूजा स्थल बनाना पूरी तरह से सही नहीं माना जाता है. वैसे तो बालकनी में खुली हवा और प्राकृतिक रोशनी आती है, जो सकारात्मक ऊर्जा के लिए अच्छी है, लेकिन कुछ बेहद महत्वपूर्ण वास्तु नियमों और व्यावहारिक कारणों की वजह से इसे टालने की सलाह दी जाती है. अगर आपके पास घर के अंदर जगह की कमी है और आप बालकनी में ही मंदिर रख रहे हैं, तो आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा.
बालकनी में मंदिर न रखने के मुख्य कारण
दिशा का दोष
वास्तु के अनुसार मंदिर के लिए सबसे शुभ दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) होती है. अगर आपकी बालकनी इस दिशा में नहीं है (जैसे दक्षिण या पश्चिम में), तो वहां मंदिर रखने से वास्तु दोष लग सकता है.
पवित्रता और मर्यादा
बालकनी घर का बाहरी हिस्सा होती है जहां धूल-मिट्टी, पक्षियों की बीट या बाहर की अशुद्ध हवा आसानी से आती है. मंदिर जैसे अत्यंत पवित्र स्थान के लिए ऐसी स्थिति को ठीक नहीं माना जाता. इसके अलावा, कई बार लोग बालकनी में कपड़े सुखाते हैं, जो पूजा स्थल के सामने या ऊपर नहीं होना चाहिए.
स्थायित्व का अभाव
वास्तु में माना जाता है कि भगवान का स्थान स्थिर और सुरक्षित होना चाहिए. खुली बालकनी में मौसम के बदलाव (तेज धूप, बारिश, तूफान) से मूर्तियों या तस्वीरों को नुकसान पहुंच सकता है.
मजबूरी में अगर बालकनी में मंदिर रखना ही पड़े, तो क्या करें?
दिशा की जांच करें
सुनिश्चित करें कि मंदिर बालकनी के उत्तर-पूर्व (North-East) कोने में ही रखा हो. पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
कवर या कैबिनेट का इस्तेमाल करें
मंदिर खुला रखने के बजाय लकड़ी या संगमरमर का एक ऐसा मंदिर (कैबिनेट) रखें जिसमें दरवाजे या पर्दा हो. रात के समय और उपयोग में न होने पर मंदिर को ढककर रखें ताकि बाहरी अशुद्धियों से बचाव हो सके.
शीशे की खिड़की (ग्लास एनक्लोजर)
अगर संभव हो तो बालकनी के उस हिस्से को कांच की खिड़की या स्लाइडर से कवर कर दें ताकि वह हिस्सा सीधे तौर पर "खुला" न रहे और धूल-बारिश से सुरक्षित रहे.
साफ-सफाई और जूते-चप्पल
बालकनी के उस हिस्से में कभी भी जूते-चप्पल न रखें और न ही वहां झाड़ू-कूड़ेदान जैसी चीजें होनी चाहिए.
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