रत्न धारण करते हुए भूल कर भी न करें ये गलती

नौ ग्रहों में किसी ग्रह के कमजोर होने पर ज्योतिषी अक्सर रत्न धारण करने की सलाह देते हैं. पर रत्न अपना सकारात्मक प्रभाव तभी दिखा पाएगा, जब उसे सही नियमानुसार धारण किया जाए. रत्नों का नकारात्मक प्रभाव भी होता है. इसलिए रत्न धारण करते समय क्या करें और क्या न करें, यहां जानिये...

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रत्न धारण करें जरा संभलकर रत्न धारण करें जरा संभलकर

ज्योतिष शास्त्र में रत्न पहनने के पूर्व कई निर्देश दिए गए हैं. रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज्यादा पहने जाते हैं. सूर्य के लिए माणिक, चन्द्र के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरु के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, राहु के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनियां.

पर रत्नों का आपके जीवन पर कैसा असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उसे में पहना है.

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जब आप रत्न धारण करते हैं तो किन बातों का विशेष ख्याल रखें, ताकि रत्न आपको शुभ फल प्रदान करें. रत्न कब बदलें, क्या रत्नों को दूध में डालकर रखना चाहिए या नहीं आदि जैसे कई सवालों के जवाब यहां दिए जा रहे हैं...

रत्न पहनते समय क्या करें और क्या ना करें

किसी भी रत्न को दूध में ना डालें. अंगूठी को जल से एक बार धोकर पहनें. रत्न को दूध में डालकर रात भर ना रखें. कई रत्न दूध को सोख लेते हैं और दूध के कण रत्नों में समा कर रत्न को विकृत कर देते हैं. अपने मन की संतुष्टि के लिए अपने ईष्ट देवी की मूर्ति से स्पर्श करा कर रत्न धारण कर सकते हैं.

कब रत्न धारण ना करें
यह देख लें कि कहीं 4, 9 और 14 तिथि तो नहीं है. इन तारीखों को रत्न धारण नहीं करना चाहिए. यह भी ध्यान रखें कि जिस दिन उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8,12 में ना हो. अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन भी रत्न धारण ना करें.

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रत्न धारण करते समय मुख किस दिशा की ओर रखें
हमेशा दोपहर से पहले सुबह सूर्य की ओर मुख करके धारण करना चाहिए.

किस नक्षत्र में रत्न धारण करें
मोति, मूंगा जो समुद्र से उत्पन्न रत्न हैं, यदि रेवती, अश्विनी, रोहिणी, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्र में धारण करें तो विशेष शुभ माना जाता है. सुहागिन महिलाएं रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य नक्षत्र में रत्न धारण ना करें. ये रेवती, अश्विनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा नक्षत्र में करें, तो विशेष लाभ होता है.

रत्न कब बदलें
ग्रहों के 9 रत्नों में से मूंगा और मोति को छोड़कर बाकी बहुमूल्य रत्न कभी बूढ़े नहीं होते हैं. मोती की चमक कम होने पर और मूंगा में खरोंच पड़ जाए तो उसे बदल देना चाहिए. माणिक्य, पन्ना, पुखराज, नीलम और हीरा सदा के लिए होते हैं. इनमें रगड़, खरोच का विशेष असर नहीं होता है. इन्हें बदलने की जरूरत नहीं होती है.

किस धातु में रत्न धारण करें
और सस्ते रत्न जैसे मोति, मूंगा और उपरत्न चांदी या सस्ती धातु में धारण कर सकते हैं.

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