देशभर में मकर संक्रांति पर लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

देश के अलग-अलग प्रांतों में मकर संक्रांति से जुड़ीं कई मान्यताएं और परंपराएं हैं. इसी आस्था और विश्वास के साथ शुक्रवार को यह पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया.

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दीपल सिंह / IANS

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 6:04 PM IST

शुक्रवार को मकर संक्राति को देशभर में पूरी आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया. यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है और इस मुहूर्त को मकर संक्रांति के कहते हैं. भारत में मकर संक्राति पर कई परंपराओं का चलन है. इस अवसर पर दान करने के साथ ही नदी में स्नान करने का भी विशेष महत्व है.

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मध्य प्रदेश में मकर संक्रांति की धूम रही. इस पर सुबह से ही श्रद्धालु होशंगाबाद, जबलपुर और अमरकंटक में नर्मदा नदी में डुबकी लगाने पहुंचे. लोग शरीर पर तिल लगाकर नदी में डुबकी लगाते दिखे. मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई.
गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद राज्य में इस पर्व की धूम शुरू हो गई थी. उज्जैन में भी क्षिप्रा नदी के तट पर लोग ने करके बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचकर पूजा की. ओरछा में बेतवा नदी में पुण्य स्नान के बाद रामराजा के मंदिर में अराधना करने वालों की भारी भीड़ रही.

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में संगम तट पर शुक्रवार को लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई. मकर संक्रांति की वजह से श्रद्धालु रात में ही गंगा तट पर पहुंचे और सुबह होते ही गंगा स्नान शुरू हो गया. संगम के अलावा अन्य तटों पर भी लोगों ने स्नान किया. कुल 7,260 फीट जगह में 12 स्नान घाट बनाए गए हैं. मेला प्रशासन ने अनुमान लगाया था कि मकर संक्रांति के मौके पर यहां 25 लाख लोग स्नान करेंगे.

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बिहार में राजधानी पटना सहित कई क्षेत्रों में शुक्रवार को के मौके पर गंगा और कई नदियों में लोगों ने धार्मिक डुबकी लगाई. इस मौके पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य किए. हालांकि, बिहार के कुछ क्षेत्रों में गुरुवार को भी मकर संक्रांति मनाई गई थी. शुक्रवार सुबह ठंड के बावजूद लोगों ने गंगा के घाटों पर पहुंचकर स्नान किया.

ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में डुबकी लगाने और गंगा तट पर तिल का दान करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है. जानकारों का कहना है कि सूर्य के धनु से मकर राशि में जाने से 'खर मास' भी समाप्त हो जाता है और शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. यूपी में मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही और तिलकूट खाने की भी परंपरा है.

वहीं तमिलनाडु में शुक्रवार को लोग उत्साह के साथ मनाते नजर आए. लोगों सुबह से ही नहाकर नए कपड़े पहने मंदिरों में पूजा के लिए पहुंचे. पोंगल में लोग सूर्य, वर्षा और खेतों में काम करने वाले जानवरों का धन्यवाद करते हैं. इस दिन घरों में पारंपरिक खाना बनता है. पोंगल की चीजों को दूध में उबाला जाता है. शक्कर, घी और दूध से तैयार पारंपरिक खाने का भोग सूर्य को लगाया जाता है और उनका धन्यवाद किया जाता है. फिर सभी एक-दूसरे को पोंगल की शुभकामनाएं देते हैं.

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