पीएम मोदी भी करते हैं नवदुर्गा की पूजा, जानिये गुजरात में कैसे मनाते हैं दुर्गा पूजा

पीएम मोदी हर साल नवरात्र में नौ दिन का व्रत रखते हैं. जानें गुजरात में किस तरह मनाया जाता है नवरात्र का त्यौहार...

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आरती उतारते पीएम मोदी आरती उतारते पीएम मोदी

वंदना भारती / गोपी घांघर

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 9:49 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो ईश्वरवादी हैं. वो परम शक्त‍ि में यकीन रखते हैं. शायद यही वजह है कि वो हर साल नवरात्र में नौ दिन व्रत रखते हैं.

देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न है. जहां कोलकाता में महिलाएं सिंदूर से खेला करती हैं वहीं उत्तरी भारत में नवरात्र के दसवें दिन दशहरा के रूप में मनाते हैं.

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पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के रहने वाले हैं और वहां मनाने का तरीका अलग है. जानिये, गुजरात में कैसे मनाते हैं ...

गुजरात में आज भी एक पांरपारीक तरीकों के साथ मनाई जाती है. नौ दिन मां अम्बा की आराधना के साथ-साथ लोग गराब भी खेलते हैं.

पहले दिन गुजरात में मां अम्बा की आराधना के साथ-साथ मिट्टी की मटकी, जिस में छोटे-छोटे छेद होते हैं, उस में अखंड दीये के साथ मां की स्थापना कर जाती है.

इसे गुजरात में गरबा कहते हैं. नवरात्र के नौ दिनों के दौरान इसी गरबा की पूजा की जाती है. हर दिन आरती की जाती है और दशहर के दिन मां की विदाई होती है.

घरों के अंदर मां के मिट्टी के गरबा के जरिये होती है. वहीं मंदिरों में मां के स्थापना के तौर पर बड़ी मिट्टी की मटकी रखी जाती है. इसके नीचे गेहूं, बाजरा और धान के दाने डाले जाते हैं.

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इन अनाजों में पानी देते हैं और धीरे-धीरे इनमें से अंकुर निकलना शुरू हो जाता है. नवरात्र के नौ दिनों के दौरान ये छोट-छोटे पौधों का रूप ले लेते हैं.

गुजरात में लोग इन्हें अपनी अलमारियों में शगुन और मां के आर्शीवाद के रूप पर रखते हैं.

गुजरात में पंडाल या मूर्ति स्थापना का रिवाज नहीं है. यहां लोग खुले आसमान के नीचे गरबा खेलते हैं. इसलिए सोसायटी या फिर गरबा खेले जाने वाली जगहों पर भी मां की मूर्ति नहीं, बल्क‍ि तस्वीर ही रखी जाती है.

दांडीया शुरू करने से पहले मां की आरती होती है. यही नहीं गरबा खत्म होने से पहले भी लोग मां की आरती करते हैं.

गुजरात में आज भी ये परंपरा है कि यहां रात के वक्त महिलाएं मिट्टी के गरबा जो कि अपने घर में स्थापना करते हैं, उसे सर पर लेकर गरबा के ताल पर झुमती हैं. माना जाता है कि जब सर पर मिट्टी का गरबा होता है तो देवी मां खुद आप के साथ झुमती हैं.

वहीं आज भी पारंपरिक गुजराती देवी के गरबा के गीतों के ताल पर ही दांडिया खेलते हैं.

वक्त के साथ गरबा के तरीकों में भी बदलाव आ रहा है. आज के युवा पारंपरा के साथ-साथ आधुनिकता का भी इस्तमाल कर रहे हैं. के पारंपरिक दांडिया को वेस्टर्न स्टाइल के दांडिया के साथ मिक्स किया जा रहे है.

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