500 kg केसर आम का महाभोग! भीषण गर्मी में भगवान को चढ़ाया 'मैंगो अन्नकूट'

सनातन परंपरा में ऋतु के अनुसार, भगवान को ताजे फलों का भोग लगाने की सदियों पुरानी रीत है. इसी रीत को निभाते हुए एकादशी के दिन 2500 किलो तरबूज का भोग लगाया गया था. वहीं आज देवों को प्रसन्न करने के लिए अनोखा 'मैंगो अन्नकूट' सजाया गया.

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एकादशी के दिन भगवान को 2500 किलो तरबूज का भोग लगाया गया था. (Photo: ITG) एकादशी के दिन भगवान को 2500 किलो तरबूज का भोग लगाया गया था. (Photo: ITG)

हेताली शाह

  • गुजरात,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:44 PM IST

गुजरात के वड़ताल से आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आपकी आंखें ठहर जाएंगी. गर्मी का मौसम है और बाजारों में आम की बहार है. लेकिन क्या आपने कभी भगवान के दरबार में 'आमों का पहाड़' देखा है? जी हां, गुजरात के सुप्रसिद्ध स्वामीनारायण संप्रदाय के महातीर्थ 'वड़ताल धाम' में आज साक्षात देवों को रिझाने के लिए 'अन्नकूट' सजाया गया. लेकिन यह कोई साधारण अन्नकूट नहीं था, बल्कि पूरे 500 किलो 'केसर आम' का महाभोग था.

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चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी के बीच वड़ताल स्थित स्वामीनारायण मंदिर का गर्भगृह आज रसीले आमों की खुशबू से महक उठा है. मौका था शनिवारी अमावस्या के पावन और शुभ योग का. सनातन परंपरा में ऋतु के अनुसार, भगवान को ताजे फलों का भोग लगाने की सदियों पुरानी रीत है. इसी रीत को निभाते हुए एकादशी के दिन 2500 किलो तरबूज का भोग लगाया गया था. वहीं आज देवों को प्रसन्न करने के लिए अनोखा 'मैंगो अन्नकूट' सजाया गया.

भक्त स्नेहल प्रमोद भाई पटेल की भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था के चलते आज श्री स्वामीनारायण के चरणों में 500 किलो शुद्ध और चुनिंदा केसर आम का नैवेद्य अर्पित किया गया. मंदिर परिसर में हर जगह केसर आम की खुशबू मानो भक्तों का मन मोह रही थी. भगवान के सामने सिर्फ आम का ढेर ही नहीं था, बल्की आम रस और आम को काटकर भी परोसा गया.

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दूर-दूर से आए भक्तों ने किए दर्शन
जैसे ही मंदिर के कपाट खुले भगवान का यह अनूठा और दिव्य स्वरूप देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए. पीत रंग के रसीले आमों के बीच विराजे भगवान के दर्शन के लिए दूर-दूर से आए हजारों हरि भक्तों का तांता लग गया. हर कोई इस अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों और कैमरों में कैद करने के लिए बेताब दिखा.

​इस अद्भुत मैंगो अन्नकूट के सफल आयोजन पर वड़ताल मंदिर के चेयरमैन डॉक्टर संत वल्लभ दास स्वामी और मुख्य कोठारी देव प्रकाश दास स्वामी ने यजमान परिवार को आशीर्वाद दिया और उनके उत्तम जीवन की प्रार्थना की. इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य भक्ति के साथ-साथ प्रकृति के उपहारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था.

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