वैदिक ज्योतिष में अनेक शुभ और अशुभ योगों का वर्णन है, जिनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, करियर, आर्थिक स्थिति और मानसिक अवस्था पर पड़ता है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण योग है- सकट योग. सकट यानी संकट. यह योग जीवन में उतार-चढ़ाव, संघर्ष और अस्थिरता की परिस्थितियां उत्पन्न करता है. हालांकि, हर कुंडली में इसका प्रभाव समान नहीं होता है और कई स्थितियों में इसका प्रभाव समाप्त या काफी कम भी हो जाता है. यहां तक कि कुछ विशेष परिस्थितियों में सकट योग मुकुट योग बन जाता है. लेकिन मुकुट योग से पहले सकट योग के बारे में जानना जरूरी है.
कुंडली में कैसे देखें सकट योग?
जब जन्म कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति विशेष संबंध में स्थित होते हैं. तब सकट योग का निर्माण होता है. यदि बृहस्पति चंद्रमा से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो या चंद्रमा बृहस्पति से इन भावों में हो तो सकट योग बनता है. चंद्रमा मन, भावनाओं, मां और आपकी चेतना का प्रतिनिधित्व करता है. जबकि बृहस्पति ज्ञान, भाग्य, धर्म और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है. इन दोनों ग्रहों के प्रतिकूल संबंध के कारण जीवन में बाधाओं और संघर्षों की संभावना बढ़ जाती है.
सकट योग के प्रभाव
जिन लोगों की कुंडली में सकट योग होता है, उनके जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपेक्षाकृत अधिक परिश्रम करना पड़ सकता है. ऐसे लोगों के जीवन में आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं रहती और समय-समय पर लाभ व हानि दोनों का सामना करना पड़ सकता है. कई बार व्यक्ति को अचानक धन लाभ होता है. लेकिन वह लंबे समय तक टिक नहीं पाता है. करियर में रुकावटें, योजनाओं में देरी, मानसिक तनाव और निर्णय लेने में असमंजस जैसी स्थितियां भी देखने को मिल सकती हैं. कुछ मामलों में व्यक्ति को पारिवारिक या सामाजिक जीवन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि ऐसे लोग संघर्षों से सीखते हुए अंततः मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं.
कब भंग होता है सकट योग?
1. यदि बृहस्पति उच्च राशि कर्क में, अपनी स्वयं की राशि धनु, मीन राशि में या केंद्र भावों में मजबूत स्थिति में हो तो सकट योग का नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है. इसी प्रकार यदि चंद्रमा बलवान हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहा हो या शुभ भाव में स्थित हो, तब भी योग का दुष्प्रभाव घट जाता है. कुंडली में यदि शक्तिशाली राजयोग, गजकेसरी योग, धनयोग या अन्य शुभ योग मौजूद हों तो वे सकट योग के प्रतिकूल परिणामों को संतुलित कर सकते हैं. अनुकूल ग्रह दशाएं और शुभ गोचर भी इसके प्रभाव को कमजोर करने में सहायक माने जाते हैं.
2. चंद्रमा पर मंगल की दृष्टि होने से भी सकट योग भंग हो जाता है. किसी भी व्यक्ति के जीवन का आकलन केवल एक योग के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. सकट योग के प्रभाव की तीव्रता ग्रहों की शक्ति, भावों की स्थिति, दृष्टियों, दशा-अंतर्दशा और संपूर्ण कुंडली के विश्लेषण पर निर्भर करती है. इसलिए किसी कुंडली में सकट योग दिखाई देने मात्र से नकारात्मक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं.
अंशु पारीक