Devshayani Ekadashi 2026: 24 या 25 जुलाई, देवशयनी एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

हिंदू पंचांग के मुताबिक, वर्ष 2026 में आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 09:14 बजे होगा. यह तिथि 25 जुलाई को सुबह 11:36 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी.

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देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है. (Photo: ITG) देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:50 PM IST

देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म की प्रमुख एकादशियों में गिनी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है. इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है. इसलिए इस अवधि में भगवान शिव की पूजा का महत्व अधिक बताया गया है. मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर विधि-विधान से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं. साथ ही, कुछ विशेष उपाय कर उन्नति और धन लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं.

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देवशयनी एकादशी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के मुताबिक, वर्ष 2026 में आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 09:14 बजे होगा. यह तिथि 25 जुलाई को सुबह 11:36 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा.

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:16 बजे से सुबह 04:57 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक
संध्या काल मुहूर्त- शाम 07:17 बजे से रात 08:19 बजे तक
पारण का समय- 26 जुलाई को सुबह 05:38 बजे से सुबह 08:22 बजे बजे तक

इस दिन कैसे करें पूजा?
देवशयनी एकादशी की सुबह स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक करें. भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल और पीले रंग के फल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करने से भी बड़ा लाभ मिलता है.

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इसके बाद किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें. जल में थोड़ा दूध मिलाकर अभिषेक करना भी शुभ माना गया है. भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं, 11 बेलपत्र अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें. मान्यता है कि इससे चातुर्मास के दौरान भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

व्रत और दान का क्या है महत्व?
देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और श्रद्धा से दान करने से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों में राहत मिल सकती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है. भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करना शुभ माना गया है. इस दिनअन्न, वस्त्र, मौसमी फल और जल से भरे घड़े का दान करना शुभ होता है. साथ ही, आप पीली चीजें जैसे पीले फल, पीली मिठाई, पीले वस्त्र चने की दाल या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी कर सकते हैं.

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