राजस्थान के कोटा में एक नाबालिग बच्ची की सूझबूझ और साहस ने बड़ा बदलाव ला दिया. अपनी शादी रुकवाने के लिए उसने खुद मदद मांगी और एक फोन कॉल ने उसका जीवन बदल दिया. 26 अप्रैल को तय बाल विवाह को प्रशासनिक टीम ने समय रहते रोक दिया.
जानकारी के अनुसार, बच्ची ने Childline India Foundation की हेल्पलाइन पर कॉल कर बताया कि उसके माता पिता उसकी शादी झालावाड़ निवासी युवक से कराने जा रहे हैं, जबकि वह इसके लिए तैयार नहीं है. उसने यह भी बताया कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जा रही है. नाबालिग लड़की ने फोन पर कहा- 'अंकल, मेरा बाल विवाह रुकवाओ, घर वाले मेरी शादी करने जा रहे हैं.'
सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल अधिकारिता विभाग और सृष्टि सेवा समिति की टीम अलर्ट हो गई. इसी बीच बालिका ने दोबारा कॉल कर बताया कि वह घर से निकलकर डीसीएम रोड पर खड़ी है. टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया.
कार्रवाई के तहत काउंसलर महिमा पांचाल, सुपरवाइजर बंटी सुमन, केस वर्कर आकाश कुमार और जिला समन्वयक भूपेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर बालिका को संभाला और पूरी स्थिति समझी. इसके बाद मामला उद्योग नगर थाने में दर्ज कराया गया.
बालिका को आगे की प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां काउंसलिंग के बाद उसे फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर राजकीय बालिका गृह में अस्थायी आश्रय दिया गया है.
प्रशासन ने दो टूक कहा है कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर उठाया गया कदम जिंदगी की दिशा बदल सकता है.
चेतन गुर्जर