ससुराल का मिला साथ तो बहू ने कर दिखाया कमाल... नागौर की डिंपल ने पास की मुश्किल परीक्षा, बोलीं- ये सबका आशीर्वाद

राजस्थान के नागौर की डिंपल चौहान ने साबित कर दिया कि अगर सपनों के साथ परिवार का साथ मिल जाए तो सबसे मुश्किल मंजिल भी हासिल की जा सकती है. ससुराल वालों के प्रोत्साहन और परिवार के आशीर्वाद से उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC एग्जाम पास कर ली. उन्होंने ऑल इंडिया 131वीं रैंक हासिल की. डिंपल का कहना है कि यह पूरे परिवार के सहयोग और आशीर्वाद का परिणाम है.

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नागौर की डिंपल चौहान ने पूरा किया सपना. (Photo: Screengrab) नागौर की डिंपल चौहान ने पूरा किया सपना. (Photo: Screengrab)

केशाराम गढ़वार

  • नागौर,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST

कहते हैं कि अगर सपनों के साथ परिवार का साथ मिल जाए, तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी आसान लगने लगती है. राजस्थान के नागौर और जालौर जिलों के लिए ऐसी ही इंस्पिरेशन हैं डिंपल चौहान, जिन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर मिसाल कामय की है. यूपीएससी एग्जाम में ऑल इंडिया 131वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जगह बना ली.

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डिंपल चौहान की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिद, धैर्य और परिवार के सपोर्ट की कहानी है, जो हर असफलता के बाद भी उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा. इस पूरे सफर में उनके ससुराल वालों ने भी उन्हें उतना ही प्रोत्साहित किया, जितना मायके वालों ने.

शादी के बाद अक्सर महिलाओं के लिए करियर और सपनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन जाता है. लेकिन डिंपल के मामले में ससुराल वालों ने उन्हें पूरी आजादी और सहयोग दिया, जिससे वह अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान दे सकीं.

पांचवें प्रयास में मिली बड़ी सफलता

डिंपल ने UPSC में लगातार प्रयास किए. कई बार सफलता मिली, लेकिन वह रैंक नहीं मिल पाई, जिससे उन्हें मनचाहा कैडर मिल सके.

एक बार तो उनकी रैंक 800 के आसपास आई. कई लोगों के लिए यह भी बड़ी उपलब्धि होती, लेकिन डिंपल का सपना IAS बनना था. इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी. आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 131वीं रैंक हासिल कर सपना पूरा कर लिया.

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नौकरी के साथ तैयारी का सफर

डिंपल चौहान दिल्ली सरकार के ट्रेड एंड टैक्स डिपार्टमेंट में सहायक आयुक्त के पद पर हैं. नौकरी की व्यस्तता के बीच UPSC की तैयारी करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. थकान जरूर होती थी, लेकिन लक्ष्य इतना बड़ा था कि वह हर मुश्किल को पीछे छोड़ देती थीं.

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उन्होंने अपने वैकल्पिक विषय के रूप में दर्शनशास्त्र (Philosophy) चुना. यह विषय उन्हें सोचने और समझने का नया नजरिया देता था, जो सिविल सेवा परीक्षा में भी उनके लिए मददगार बना.

डिंपल की पढ़ाई भी हमेशा से शानदार रही है. उनकी शुरुआती शिक्षा उदयपुर और कोटा में हुई. इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी गुवाहाटी से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की. यही मजबूत शैक्षणिक आधार UPSC की तैयारी में मददगार साबित हुआ.

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

डिंपल की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा सपोर्ट रहा है. उनके पिता रमेश चौहान जालौर में डिप्टी सीएमएचओ रह चुके हैं और पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी मां सरोज चौहान ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया.

वहीं ससुराल पक्ष ने भी उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया. उनके ससुर श्रवण राम बिडियासर अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में अधीक्षण अभियंता रहे हैं, जबकि सास वंदना चौधरी राजस्थान हाईकोर्ट की अधिवक्ता हैं.

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डिंपल चौहान की सफलता कई मायनों में खास है. यह कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि एक नया मौका होती है खुद को और बेहतर बनाने का.

पति का भी मिला पूरा साथ

डिंपल चौहान अपने पति पवन चौधरी को भी अपनी सफलता का बड़ा श्रेय देती हैं. पवन खुद भी UPSC की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने हमेशा डिंपल को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. 

उनकी यात्रा खास तौर पर उन युवाओं और कामकाजी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो नौकरी के साथ-साथ बड़े सपने देखती हैं. पांच बार प्रयास करना, कई बार निराशा झेलना और फिर भी हार न मानना- यह जिद ही उन्हें मंजिल तक लेकर गई.

डिंपल की सफलता की खबर जैसे ही सामने आई, नागौर जिले के जायल उपखंड के सोमणा गांव और जालौर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने उन्हें बधाइयां दीं.

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