हिमंत बिस्वा सरमा को असम बीजेपी हीरो के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है. असम में इसी साल अप्रैल-मई में देश के पांच राज्यों के साथ विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं - और चुनावों से पहले, हीरो की वही छवि दिखाने की कोशिश है, जो हिमंत बिस्वा सरमा के हाव-भाव, बयानों और सरकारी नीतियों में देखने को मिलती रही है.
'पॉइंट ब्लैंक शॉट' कैप्शन के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में हिमंत बिस्वा सरमा को एयर राइफल लिए हुए निशाना साधते हुए दिखाया गया था. और, 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' के टार्गेट पर कुछ लोगों की तस्वीरें हैं, जो मुस्लिम समुदाय की तरह टोपी पहने हुए देखे गए. ये वीडियो असम बीजेपी ने सोशल साइट X पर अपने आधिकारिक अकाउंट से शेयर किया था, लेकिन बढ़ते विरोध और हिंसा भड़काने के आरोपों के बाद डिलीट भी कर दिया है.
बीजेपी ने वीडियो डिलीट तो कर दिया है, लेकिन उसे किसी तरह का अफसोस नहीं है. बीजेपी का कहना है कि वीडियो डिलीट, बात खत्म.
अक्टूबर, 2025 में भी असम बीजेपी ने ऐसे ही एक वीडियो शेयर किया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था. और, उसे भी डिलीट किया गया था - मुद्दे की बात ये है कि उस वीडियो में भी असम के मुस्लिम समुदाय को ही निशाना बनाया गया था, और दोनों ही वीडियो में AI का इस्तेमाल किया गया.
कांग्रेस के साथ साथ तृणमूल कांग्रेस भी हमलावर है, और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में दखल देने की मांग की है - सवाल है कि इतना कुछ होने के बावजूद क्या चुनाव आयोग को नहीं लगता कि ये मामले संज्ञान लेने लायक है?
वीडियो में क्या क्या था?
वीडियो के ओपनिंग शॉट में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा टार्गेट पर पूरी तरह फोकस नजर आते हैं. बीच बीच में कुछ ऐसे सीन भी हैं, जो AI की मदद से क्रिएट किए हुए लगते हैं. अगले सीन में टार्गेट शो किया गया है, जहां दाढ़ी और टोपी पहने दो लोग हैं. बनयान और टोपी पहने एक शख्स बैठा हुआ है, जिसमें थोड़ा गौर करने पर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई का अक्स भी महसूस किया जा सकता है. तस्वीरों के रूप में ये टार्गेट दीवार पर टांगे गए हैं, जिसके ऊपर लिखा है - NO MERCY.
वीडियो के आखिर में हिमंत बिस्वा सरमा हाथ में पिस्टल लिए दिखाए गए हैं, और उससे पहले असमिया भाषा में भी कई बातें लिखी हैं. मसलन, 'तुम पाकिस्तान क्यों नहीं चले गए?' और 'बांग्लादेशियों के लिए कोई माफी नहीं है.'
वीडियो को लेकर असम बीजेपी के प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा का कहना है कि इसमें कहने को कुछ नहीं है, क्योंकि पोस्ट हटा दी गई है. असम बीजेपी के सोशल मीडिया संयोजक बिस्वजीत खौंड ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, सिर्फ इतना कहा कि टीम में कई युवा सदस्य हैं - पिछले साल भी असम बीजेपी के हैंडल से एक AI-जेनरेटेड वीडियो पोस्ट किया गया था.
उस वीडियो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर, 2025 को सोशल साइट X और बीजेपी की असम इकाई को नोटिस जारी किया था. एक याचिका में AI-जेनरेटेड वीडियो को हटाने की मांग की गई है. वीडियो के जरिए ये मैसेज देने की कोशिश की गई थी कि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हारने की स्थिति में असम के 'मुसलमानों के कब्जे में चले जाने' मैसेज देने की कोशिश थी, जिसे बड़े ही अपमानजनक और मनहूस तरीके से दिखाया गया था. बाद में वीडियो डिलीट कर दिया गया था.
वीडियो को लेकर विपक्ष हमलावर
कांग्रेस का कहना है कि वीडियो हटाना पर्याप्त नहीं है. केरल से कांग्रेस सांसद और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बीजेपी के वीडियो को नरसंहार की खुली अपील करने वाला बताया है, और कहा है कि उसे ट्रोल कंटेंट बोलकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. केसी वेणुगोपाल ने न्यायपालिका से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है. कांग्रेस नेता का आरोप है, इस तरह का संदेश ऊपर से फैलाए जा रहे जहर को दर्शा रहा है.
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का आरोप है, मुख्यमंत्री को मुस्लिम पुरुषों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है और POINT BLANK SHOT जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. वीडियो को नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने पूछा है कि क्या अदालतें और संस्थाएं सोई हुई हैं, जबकि हालात खतरनाक दिशा में बढ़ रहे हैं? सुप्रिया श्रीनेत ने बीजेपी का वो वीडियो भी शेयर किया है.
- वीडियो -
तृणमूल कांग्रेस की असम इकाई ने बीजेपी के वीडियो को 'नफरत का प्रदर्शन' बताया है, और आरोप लगाया है कि ये सब नफरत को न्यू नॉर्मल बनाने का प्रयास है. टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बीजेपी के वीडियो को आपराधिक कृत्य और हिंसा के लिए साफ उकसावा बताया है, और कड़ी सजा की मांग की है.
तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि ये सब होने से असम में सांप्रदायिक सौहार्द्र खतरे में पड़ सकता है.
क्या ये मामला स्वतःसंज्ञान के योग्य है?
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट और संबंधित संस्थाओं से बीजेपी के वीडियो प्रकरण पर एक्शन की मांग की है. असल में, वीडियो में संप्रेषित मैसेज हिमंत बिस्वा सरमा की उन बातों को ही आगे बढ़ा रहा है, जिनमें असम के मिया समुदाय को निशाना बनाया जाता है. मिया, असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनको पूर्वी बंगाल का मूल निवासी बताया जाता है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सार्वजनिक तौर पर बोल चुके हैं कि मिया लोगों को तकलीफ देनी है. तकलीफ देने का तरीका भी बताया है, जैसे अगर मिया रिक्शा चालक हो तो उसे कम किराया दिया जाना चाहिए.
चुनावी साल के शुरू में ही मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर ऐलान किया कि पहचान और विकास आने वाले विधानसभा चुनावों में मुख्य फोकस होंगे. बोले, सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उनको राज्य से निष्कासित करने के लिए पूरी तरह तैयार है... जब तक स्वदेशी आबादी के हितों की रक्षा नहीं होती, तब तक राज्य का विकास संभव नहीं है.
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, असम की स्वदेशी आबादी के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है... बिना सुरक्षा के प्रगति का कोई अर्थ नहीं है... अवैध प्रवासियों की पहचान और निष्कासन प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाएगा.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बार बार ऐसी बातें करने, और असम बीजेपी की तरफ से बार बार एक जैसे मैसेज वाले वीडियो पर क्या चुनाव आयोग की नजर कभी नहीं पड़ती?
1. क्या चुनाव आयोग ऐसे AI-जनरेटेड वीडियो का स्वतः संज्ञान लेगा, जिसमें किसी समुदाय विशेष (यहां मुस्लिम) को लेकर नफरत, डर या हिंसा के इशारे किए जा रहे हों?
2. ये वीडियो बीजेपी की असम इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हुआ है (अब डिलीट), तो क्या चुनाव आयोग नोटिस जारी कर कोई एक्शन लेगा?
3. क्या चुनाव आयोग कोई स्पष्ट आदेश भी जारी करेगा कि ऐसा वीडियो बनाकर पोस्ट करने के बाद हटा देने भर से नहीं चलेगा - और वीडियो के मकसद, मंशा और संभावित असर के आधार पर कार्रवाई भी की जा सकती है?
4. क्या आने वाले चुनावों भी अगर ऐसे वीडियो बनाए और शेयर किए जाते हैं, तो चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मानकर जरूरी एक्शन लेगा?
मृगांक शेखर