संन्यास के रास्ते पर शिवपुरी की पूरी फैमिली... दादा, मां-पिता और भाई के बाद अब दो सगी बहनें लेंगी जैन दीक्षा

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले (Shivpuri) में पूरा परिवार संन्यास के रास्ते पर है. यहां दादा, मां, पिता और भाई के बाद दो सगी बहनें वैराग्य का रास्ता अपनाने जा रही हैं. दोनों सगी बहनें 15 नवंबर को दिल्ली में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी. इसी के साथ परिवार के 6 सदस्य मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ेंगे.

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शिवपुरी की दो बहनें लेंगी जैन दीक्षा. शिवपुरी की दो बहनें लेंगी जैन दीक्षा.

प्रमोद भार्गव

  • शिवपुरी,
  • 28 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले (Shivpuri) में पूरी फैमिली ने संन्यास (renunciation) का रास्ता अपना लिया है. यहां एक परिवार में दादा, मां-पिता और भाई के बाद अब दो सगी बहनें सांसारिक मोह त्यागकर संन्यास का रास्ता अपनाने जा रही हैं. दोनों के मन में साल 2016 से वैराग्य का मार्ग चुनने का भाव था. अब ये दोनों पहनें 15 नवंबर को दिल्ली में जैनेश्वरी दीक्षा लेंगी.

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जानकारी के अनुसार, जिले के कोलारस में रहने वाली दो बहनें ब्रह्मचारिणी रिया और गुंजन ने पहले अपने दादाजी, माता-पिता और भाई को जैन संत बनते देखा. उनसे प्रेरित होकर अब ये दोनों बहनें भी मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ गईं हैं. 15 नवंबर को दिल्ली में आचार्य विमर्श सागर महाराज से आर्यिका दीक्षा लेकर संयम पथ पर अग्रसर होंगी. इससे पहले एक ही परिवार के 6 सदस्य समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन में देखने को मिले हैं.

स्थानीय जैन समाज के लोगों का कहना है कि शिवपुरी में विशु दीदी सहित 13 नव दीक्षार्थियों का संघ आया था और उनकी भक्तिभाव से विनौली निकली और गोद भराई हुई. अब 15 नवंबर को दिल्ली में चातुर्मास कर रहे आचार्य विमर्श सागर महाराज इन सभी को दीक्षा देकर संस्कार प्रदान करेंगे.

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रिया दीदी और गुंजन दीदी का कहना है कि परिवार के सभी सदस्य वैरागी हो गए तो खुद को रागी जीवन कैसे रुचता, इसलिए वैराग्य मार्ग (recidivism) चुना है. दोनों सगी बहनें हैं. रिया दीदी 25 साल की हैं, उन्होंने हायर सेकेंडरी तक अध्ययन किया है. सिलाई-कढ़ाई में वे निपुण हैं. जब भी शहर में किसी के यहां शादी होती थी तो मेहंदी लगाने वालों में सबसे पहला नाम रिया दीदी का आता था, जबकि गुंजन दीदी 29 साल की हैं, उन्होंने बीए तक अध्ययन किया है.

रिया और गुंजन के परिवार के लोग दीक्षा लेकर जैन संत बन चुके हैं. इनमें पिता मुनि विश्वार्थ सागर, मां आर्यिका विनयांश्री, भाई मुनि विशुभ्र सागर और दादा मुनि विश्वांत सागर महाराज हैं, जिन्होंने साल 2016 में देवेंद्र नगर पन्ना में आचार्य विमर्श सागर महाराज से दीक्षा ली थी.

जब इन दोनों बहनों ने देखा तो उसी समय से उनके मन में भी वैराग्य का भाव जाग गया. अब उन्होंने मोक्ष के इस कठिन मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है. जैन परंपरा के अनुसार, आर्यिका व्रत ग्रहण करने के बाद संसार और परिवार से नाता तोड़ना होता है. इसलिए इसका अभ्यास इन दोनों बहनों ने पहले घर पर किया और फिर ब्रह्मचर्य व्रत लेकर धर्म साधना की डगर पर चलने का अंतिम निर्णय ले लिया.

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