9.5 करोड़ का इंजेक्शन! AIIMS की फाइलों में अटका 3 साल की अनिका शर्मा का इलाज, हाईकोर्ट सख्त

दुर्लभ बीमारी SMA टाइप-2 से पीड़ित मासूम अनिका का बीतता हर दिन हो रहा भारी: इलाज के लिए चाहिए करीब 9.5 करोड़ रुपये; क्राउडफंडिंग और सरकारी मदद से जुट चुके हैं 7.5 करोड़; इनवॉइस न मिलने से अटकी जीवनरक्षक दवा की खरीद; अगली सुनवाई 27 जुलाई को...

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जिंदगी और उम्मीद के बीच जंग लड़ रही इंदौर की 3 साल की अनिका.(Photo:Screengrab) जिंदगी और उम्मीद के बीच जंग लड़ रही इंदौर की 3 साल की अनिका.(Photo:Screengrab)

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

  • इंदौर,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST

MP News: इंदौर की तीन वर्षीय अनिका शर्मा के लिए समय लगातार भारी पड़ता जा रहा है. स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस मासूम का इलाज अब भी शुरू नहीं हो पाया है. जबकि परिवार, समाज और संस्थाओं की मदद से उपचार के लिए अधिकांश राशि जुटाई जा चुकी है. इसके बावजूद प्रशासनिक देरी बच्ची के इलाज की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

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दरअसल, इसी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई करते हुए दिल्ली एम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई. अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एम्स की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया.

इस पर अदालत ने साफ निर्देश दिए कि हर हाल में 23 जुलाई 2026 तक जवाब पेश किया जाए. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इलाज के लिए अब केवल सीमित राशि की जरूरत है, लेकिन एम्स की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से जीवनरक्षक इंजेक्शन की खरीद अटकी हुई है.

एक ओर केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता की प्रक्रिया लंबित है, तो दूसरी ओर क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है. देखें VIDEO:- 

हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इतने संवेदनशील मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि अनिका के लिए बीतता हर दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जिंदगी और उम्मीद के बीच की दूरी बढ़ा रहा है.

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इससे पहले, हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 22 जून को जवाब तलब किया था. साथ ही राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वह बच्ची के इलाज में किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं?

बता दें कि बच्ची के इलाज के लिए करीब 9.50 करोड़ रुपये की जरूरत है. परिजन अब तक करीब 8 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 50 लाख रुपये और तमाम लोगों एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त सहयोग राशि शामिल है.

बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाया जाना है. यह इंजेक्शन मंगवाकर उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ रहा है.

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है. इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद 'मोटर न्यूरॉन' धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है.

'मोटर न्यूरॉन' मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं.

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