मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कमजोर पड़े मानसून और बारिश की लंबी बेरुखी के बीच लोगों ने एक अनोखा टोटका किया है. शहर में गधों को गुलाब जामुन खिलाए गए. इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे. कई लोगों ने गधों की गुलाब जामुन पार्टी का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. देखते ही देखते तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह वर्षों पुरानी लोकमान्यता और परंपरा से जुड़ा प्रतीकात्मक आयोजन है. मान्यता है कि जब मानसून कमजोर पड़ जाए या समय पर बारिश न हो, तो ऐसे उपाय करने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी वर्षा होती है. इसी विश्वास के साथ लोगों ने गधों को गुलाब जामुन खिलाकर अच्छी बारिश की प्रार्थना की.
इस आयोजन के दौरान लोगों ने किसानों की समृद्धि और प्रदेश में अच्छी बारिश की भी कामना की. उनका कहना था कि लगातार कम बारिश के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई है. खेतों में फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि जल स्रोतों का स्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है.
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ऐसे में लोगों ने अपनी आस्था और लोक परंपरा के अनुसार यह अनोखा आयोजन किया. हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश का संबंध पूरी तरह मौसम प्रणालियों और वैज्ञानिक कारणों से होता है. मानसून की सक्रियता कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है. इसके बावजूद ग्रामीण और शहरी इलाकों में आज भी कई लोग पारंपरिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के आधार पर ऐसे टोटके करते हैं.
फिलहाल भोपाल में गधों को गुलाब जामुन खिलाने का यह अनोखा नजारा चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर इसके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. कोई इसे आस्था और परंपरा का हिस्सा बता रहा है, तो कोई इसे बारिश की उम्मीद में किया गया एक दिलचस्प और अनोखा आयोजन मान रहा है.
वैसे, यह पहली बार नहीं है जब बारिश बुलाने के लिए ऐसे आयोजन हुए हों. देश के अलग-अलग हिस्सों में कभी मेंढकों की शादी कराई जाती है, कहीं गधे या दूसरे जानवरों को विशेष भोजन कराया जाता है, तो कहीं विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं. इन परंपराओं का आधार लोकविश्वास है, जो लंबे समय से चला आ रहा है. अब लोगों की नजर आसमान पर है. देखना यह है कि गधों की इस 'मिठाई पार्टी' के बाद भोपाल में मानसून मेहरबान होता है या नहीं.
रवीश पाल सिंह