GPS बंद, गाड़ियां गायब और थाने में लगी लाइन, भोपाल का 3.5 करोड़ का कार स्कैम फिल्मी स्टाइल में खुला

भोपाल में रेंटल कारों के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. आरोपी गाड़ियां किराए पर लेकर उनका जीपीएस बंद कर देते थे और फिर उन्हें गिरवी रखकर बेच देते थे. पुलिस ने अब तक 31 गाड़ियां बरामद की हैं, जिनकी कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

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भोपाल में रेंटल कारों के नाम पर 3.5 करोड़ का बड़ा घोटाला. (Photo: Representational) भोपाल में रेंटल कारों के नाम पर 3.5 करोड़ का बड़ा घोटाला. (Photo: Representational)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

राजधानी भोपाल में रेंटल कारों के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस मामले ने शहर में वाहन मालिकों और रेंटल कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा दिया है. लोग अतिरिक्त कमाई के लालच में अपनी कारें किराए पर देते थे, लेकिन इसी भरोसे को हथियार बनाकर एक संगठित गिरोह ने करोड़ों रुपये का खेल कर दिया.

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यह पूरा मामला भोपाल के अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र से सामने आया, जहां पुलिस ने जांच के दौरान अब तक 31 कारें बरामद की हैं. बरामद की गई गाड़ियों की कुल कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इन गाड़ियों में थार, होंडा सिटी और डिजायर जैसी कई लग्जरी और हाई-एंड कारें भी शामिल हैं.

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह पहले कारों को रेंटल के नाम पर किराए पर लेता था. इसके बाद गाड़ियों का जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया जाता था ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके. इसके बाद इन गाड़ियों को गांव और देहात के इलाकों में ले जाकर बेहद कम कीमत पर, यानी लगभग 75 हजार रुपये एडवांस लेकर गिरवी रख दिया जाता था.

गांवों में गिरवी रखकर बेची जाती थीं कारें

इस पूरे मामले का खुलासा विदिशा निवासी गौरव कुशवाहा की शिकायत से हुआ. उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे सिंडिकेट की परतें खुलने लगीं. जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है.

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पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेश जोशी है. आरोप है कि उसने सबसे पहले गौरव कुशवाहा की स्विफ्ट डिजायर कार को 25 हजार रुपये मासिक किराए पर लिया था. गाड़ी मिलते ही उसने उसका जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया और उसे ट्रैकिंग से बाहर कर दिया.

इसके बाद इसी तरीके से अन्य कारों को भी ठिकाने लगाया गया. आरोप है कि गाड़ियों को शहर से बाहर ले जाकर गिरवी रखा गया और फिर उन्हें अलग-अलग जगहों पर बेच दिया गया. इस तरह किराए के नाम पर ली गई गाड़ियां कुछ ही दिनों में गायब कर दी गईं.

भोपाल में इस तरह के वाहन फर्जीवाड़े पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार 31 गाड़ियों की बरामदगी ने इस नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है. पीड़ित लंबे समय तक अलग-अलग थानों में शिकायत करते रहे, लेकिन बाद में अरेरा हिल्स पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया.

पुलिस ने बीएनएस की धारा 316(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है. फिलहाल मुख्य आरोपी शैलेश जोशी फरार बताया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने अपने एजेंटों के जरिए कई और कारें किराए पर ली थीं और उन्हें भी इसी तरह ठिकाने लगाया गया था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े एजेंटों और उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इन गाड़ियों को खरीदा या गिरवी रखा.

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भोपाल से लेकर यूपी-हरियाणा तक फैला नेटवर्क

फिलहाल एमपी, हरियाणा, उत्तराखंड और यूपी से बरामद गाड़ियों को अरेरा हिल्स थाने में खड़ा किया गया है. इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों के जमा होने से थाने में जगह की भी कमी हो गई है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस बड़े कार फर्जीवाड़े के हर पहलू का खुलासा किया जा सके.
 

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