रेडियो, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन का असली खेल... साहित्य आजतक के मंच पर खुलकर बोले लखनऊ के आरजे

साहित्य आजतक लखनऊ 2026 के पहले दिन स्टेज -2 पर 'यूथ एंड लखनऊ' के सत्र में लखनऊ की नई आवाजों ने अपनी बात रखी. यहां आरजे रफत, आरजे प्रतीक और इनफ्लूएंसर मानवेंद्र ने अपने अनुभव साझा किए.

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साहित्य आजतक के मंच पर आरजे मानवेंद्र, आरजे रफत और आरजे प्रतीक (Photo: ITG) साहित्य आजतक के मंच पर आरजे मानवेंद्र, आरजे रफत और आरजे प्रतीक (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:42 PM IST

साहित्य आजतक के यूथ एंड लखनऊ डिस्कशन में रविवार को लखनऊ की नई आवाजों ने श्रोताओं को सीधे संवाद और अनुभवों से जोड़ दिया. इस सत्र में आरजे रफत, मानवेंद्र और आरजे प्रतीक मेहमान के रूप में शामिल हुए और उन्होंने अपने रेडियो, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन के अनुभव साझा किए.

हम अपनी चीज़ें खत्म कर रहे हैं- आरजे रफत

आरजे रफत ने अपने दस साल से अधिक के एफएम अनुभव और बिग एफएम पर प्राइम टाइम शो के सफर को साझा किया. उन्होंने बताया कि लखनऊ में एफएम रेनबो से उनकी शुरुआत हुई, जहां सब कुछ मैन्युअल था. उन्होंने कहा, 'आप उस टाइम पानी की एक घूंट पी नहीं सकते थे क्योंकि हर चीज हाथ से ही आपको मैनेज करनी थी.'

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2017 में बिग एफएम लखनऊ में लॉन्च होने के बाद रफत ने शाम के शो 'गॉसिप विथ मल्लिका' को अपनी शैली के साथ पेश किया. 2024 में उन्होंने भारत का पहला इंस्टा रेडियो 'Instudio India' शुरू किया, जहां उन्होंने अपने खास अंदाज में सरकाज्म, सोसाइटी की बातें और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया.

रफत ने अपने रेडियो और इंस्टा रेडियो अनुभव को साझा करते हुए कहा, 'मैं बहुत सुकून से शरारत करती हूं, बहुत तीखा नहीं, लेकिन सरकाज्म बोलता है.' 

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उन्होंने सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन पर भी अपने विचार साझा किए. रफत ने कहा, 'कपड़ों के माध्यम से या पहले पर्दे के पीछे छिपा हुआ… सोशल मीडिया पर इतनी अमीरी इतनी लक्जरी देखकर हम अपनी चीज़ें खत्म कर रहे हैं. ये बात सिर्फ हिंदुस्तान की नहीं है, ऑल ओवर द वर्ल्ड ये टॉपिक है.' 

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लॉन्ग टर्म में आपको अपना खुद स्टैंड रखना होगा- मानवेंद्र

वकील से पॉडकास्टर बने मानवेंद्र अनुभव और महिलाओं से जुड़े मुद्दों की संवेदनशीलता के लिए पहचान रखते हैं. मानवेंद्र ने अपने पॉडकास्टिंग सफर को साझा किया. पेशे से वकील रह चुके मानवेंद्र ने बताया कि पॉडकास्ट शुरू करने से पहले इंस्टाग्राम पर उनके सिर्फ 300 फॉलोवर थे. उन्होंने बताया कि लोगों के सपोर्ट और अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि कभी-कभी ना किसी को एक छोटी सी होप दे दी जाए तो पता नहीं वो इंसान क्या करता है.

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मानवेंद्र ने कंटेंट क्रिएशन में रिलेवेंसी और अलग पहचान बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा, 'कॉपीकैट एक-दो दिन में सक्सेस पा सकते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में आपको अपना खुद स्टैंड रखना होगा.' उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाएं, वूमेन रिलेटेड मुद्दों पर उनके पॉडकास्ट में सक्रिय रूप से चर्चा करते हैं. वो कहते हैं, 'अगर आपकी नियत अच्छी हो तो सामने वाले तक सही इंटेंशन पहुंचता है. इसलिए ज्यादा सेंसरशिप की जरूरत नहीं.' 

क्रिंज वही जो तहजीब के ख‍िलाफ हो- आरजे प्रतीक

लखनऊ की तमीज, कंटेंट का बैलेंस और गोमती मुहिम के लिए जाने जाने वाले आरजे प्रतीक ने अपने लखनवी अंदाज में लखनऊ की संस्कृति और कंटेंट क्रिएशन पर बात की. उन्होंने अपने रेडियो अनुभव और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया साझा की. प्रतीक ने कहा, 'मैं जिस शहर से आता हूं, लखनऊ, वो अपनी तमीज़ के लिए जाना जाता है. अब कितने भी कंटेंट क्रिएटर आए, मेरे लिए क्रिंज वही है जो लखनऊ की तहजीब के खिलाफ हो.'  अपनेअनुभवों में उन्होंने गोमती नदी की सफाई अभियान 'गो फॉर गोमती' का सफर भी साझा किया. 

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प्रतीक ने बताया कि कैसे इस मुहिम में पहले दिन 8 लोग आए थे, आज हमारी कम्युनिटी में 8 से 9 हजार लोग शामिल हैं. हमने लखनऊ के लगभग 7 घाटों को रिवरम करने की कोशिश की है. प्रतीक ने यह भी बताया कि कंटेंट क्रिएशन में बैलेंस बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उनका पिछला गुरुकुल और संस्कृति का अनुभव उन्हें मदद करता है. उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम पे जिस वक्त मैं अपने कंटेंट शेयर करता हूँ, मैं हमेशा तर्क और बैलेंस सामने रखने की कोशिश करता हूंं. 

साहित्य आजतक के मंच पर तीनों आरजे ने युवा दर्शकों के लिए अपने अनुभव साझा किए. बताया कि कैसे कंटेंट क्रिएशन सिर्फ व्यूज और फॉलोवर्स के लिए नहीं होना चाहिए. सच्चा कंटेंट वही है जो ऑडियंस को जोड़ सके और समाज के लिए उपयोगी साबित हो. आरजे रफत ने कहा कि जो आज आप करते हो, वो कल साहित्य में लिखा जाएगा. इसलिए सोच-समझ कर और सही नियत के साथ करें. 

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