Sahitya Aajtak Lucknow: 'बस देखती रहती हूं लास्ट सीन तुम्हारा...' कवि सम्मेलन में छा गया दिल से निकला इश्क

साहित्य आजतक लखनऊ 2026 के पहले दिन स्टेज -2 पर युवा कवियों की महफिल सजी. 'ये इश्क नहीं आसां' सेशन में कव‍ियों ने नई कव‍िता का मंच सजाया. यहां आज के डि‍ज‍िटल युग में प्रेम के बदलते रूपक और बिंब रखे.

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साहित्य आजतक में कवि सम्मेलन के रंगीन मंच में कव‍िता पाठ करते कव‍ि बादल शर्मा (Photo: ITG) साहित्य आजतक में कवि सम्मेलन के रंगीन मंच में कव‍िता पाठ करते कव‍ि बादल शर्मा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST

बसंत की सोंधी धूप में प्रेम में पगी कव‍िताओं ने नजाकत के शहर को इश्कमय बना द‍िया. नये जमाने की कव‍िताओं के नये रूपक से लेकर सोशल मीड‍िया पर पसंद की गईं कई कव‍िताएं-नज्में और अवधी भाषा के शेर दर्शकों को खूब भाए. साहित्य आजतक के समृद्ध मंच पर रविवार को 'ये इश्क नहीं आसां' सेशन में युवा कवि सम्मेलन ने एक बार फिर साहित्य प्रेमियों का दिल जीत लिया.कवियों ने सिर्फ कविता पढ़ी ही नहीं, बल्कि मंच के अनुभव और व्यक्तिगत जीवन के किस्सों के जरिए श्रोताओं को गुदगुदाया भी. 

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खुद को टूटे हुए दिलों का शायर घोष‍ित करते हुए कव‍ि बादल शर्मा ने महफिल का उन्वान अपनी पत्नी के लिए लिखी कव‍िता, 'ऐनी, तेरे जैसे कोई है नहीं' से की. इसके बाद उन्होंने पत्नी से क्रश के दौरान की अपनी वो फील‍िंग जो उन्होंने कव‍िता के तौर पर लिखी थी, उसे भी साझा किया. 

चलके आई वो शब भर की जागी हुई  
बाल गीले नहा करके भागी हुई  
मैं भी उस दिन था जल्दी में आया हुआ,  
कुछ भी पहना हुआ, कुछ न खाया हुआ

इसके बाद उन्होंने पहले प्यार की भावनाओं को छूने वाली पंक्तियां 'वो चाहे ब्लॉक रखे, उसका नंबर याद है मुझको... महीना है जन्मदिन का, दिसंबर याद है मुझको' सुनाईं तो महफिल में ताल‍ियों का महासमर आ गया. 

उन्होंने अपनी कव‍िता जो कई युवाओं के दिल की दलील जैसी है, उसे भी सुनाया. 

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कहता था तुझे चाहता हूं दिलों जान से,  
अब तू ही गोलियां चला रहा जुबान से,  
हमने दलील दी तो कहीं रो ही ना पड़े  
अब कौन ही बहस में पड़े बेईमान से

बादल शर्मा की कविताओं में हास्य, प्रेम और निजी अनुभव की गहरी झलक थी. उन्होंने मंच पर अपने दर्शकों से खुलकर संवाद किया और श्रोताओं की तालियों के साथ कविताओं का आनंद बढ़ाया. 

इसके बाद मंच पर कवियत्री सोनल जैन ने अपने भावपूर्ण और संवेदनशील अंदाज में प्रेम, याद और डिजिटल युग में रिश्तों की उलझनों पर कविताएं सुनाईं. उनकी कव‍िता जो आजकल के डिज‍िटल युग की बानगी देती है, कव‍िता प्रेमियों को खूब पसंद आई. 

चेहरा है डीपी में गमगीन तुम्हारा  
प्यार भरा गुस्सा है नमकीन तुम्हारा  
जब से बंद हुई है बातचीत हमारी  
बस देखती रहती हूं लास्ट सीन तुम्हारा...

इसके बाद उन्होंने आजकल मोबाइल में कैद होती जिंदगी के हालातों पर कव‍िता सुनाई. 

मोबाइल ने बदल दिए हैं जीवन के हालात  
आओ मिल बैठ के कर लें दिल से दिल की बात  
गूगल वूगल क्या समझेंगे क्या है प्रेम की भाषा  
भई क्या जाने आशा और निराशा

सोनल जैन ने 'वो बात मुलाकात की टाली नहीं गई, ऐसी मुलाकात कि खाली नहीं गई, और हाथों से उसने इस तरह गुलाल लगाया, अब तक मेरे रुकसार की लाली नहीं गई... कविता से प्रेम के उत्सव से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं. सोनल की कविताओं में हास्य, आत्मनिरीक्षण और जीवन के सुख-दुख की झलक साफ दिखाई दी. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ने आजकल प्रेम और संवाद के स्वरूप बदल दिए हैं. 

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सोनल के बाद बारी थी कवि मोहित शौर्य की. युवा कवि मोहित शौर्य ने जीवन की सरलताओं और कठिनाइयों पर आधारित कविताएं सुनाईं.उन्होंने साहित्य आजतक के मंच की सराहना करते हुए अपनी कव‍िता सुनाई.  

कलमकार चाहे तो तूफान ला सकता है  
मेहनत से भी खूब कमा खा सकता है  
साहित्य आज तक ने दुनिया को दिखलाया,  
कविता से स्टार बना जा सकता है

युवा कव‍ि मोहित की पंक्त‍ियां 'मत पूछो क्या मिला मुझे इन यारों से,  मैंने अपने गम के हिस्सेदार कमाए... गलत शख्स को दिल में नहीं घुसने देते,  देखो मैंने कैसे चौकीदार कमाए' श्रोताओं को खूब पसंद आईं. यहां नीचे दी जा रही उनकी इस कविता ने युवाओं के जज्बातों को करीब से छुआ. 

ये मुमकिन हो नहीं सकता कि मैं अच्छाई ना देखूं,  
मगर ये भी नहीं कि मैं तेरी सच्चाई ना देखूं,  
अगर तू पास आये तो तेरे दिल में उतर जाऊं  
अगर तू दूर जाए तो तेरी परछाई ना देखूं

मोहित की कविताओं में संघर्ष, दोस्ती और अच्छाई का भाव साफ दिखाई दिया. उन्होंने बताया कि साहित्य आजतक ने उन्हें मंच पर आने और खुद को व्यक्त करने का आत्मविश्वास दिया. 

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मोह‍ित के बाद धर्मराज कव‍ि शायर ने शिवरात्रि और प्रेम पर आधारित कविताओं में सामाजिक और व्यक्तिगत संदर्भों को पिरोया. उन्होंने अपनी कविताओं से खूब ठहाके भी लगवाए. 

उसके खत का जवाब दे आया  
प्यार में सब हिसाब दे आया  
इश्क अंधा था, मैं भी अंधों की तरह 
उसकी मां को गुलाब दे आया

अंत में उन्होंने सोशल मीड‍िया में अवधी भाषा में वायरल हो चुका उनका अवधी भाषा में लिखा मुक्तक सुनाया तो साहित्य आजतक की महफिल में खूब तालियां बजीं. धनराज की कविताओं में लोक संस्कृति, प्रेम और हास्य का संगम साफ नजर आया. 

नवंबर जस मजा जनवरी मा न पइहौ 
गद्दा जस मजा दरी मा न पइहौ
ठांस के पिस्टल बुलट से चलिहौ 
दरोगा जस मजा मास्टरी मा न पइहौ


कवियत्री प्रतिभा मिश्रा ने भी साहित्य आजतक के मंच से जीवन की व्यथा, पहला प्यार और रोमांटिक अनुभव को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया. उनकी कव‍िता 'व्यथा लिख सको जिसपे कागज बनेंगे,  हम ही पथ के रथ का अभिध्वज बनेंगे, हमें तपने दो, अपने अंतिम तपन तक,  हम ही आपके कल का सूरज बनेंगे' युवाओं को खूब पसंद आई. 

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प्रतिभा की कविताओं में भावनाओं की गहराई और अनुभव की स्पष्टता झलक रही थी. उनकी यहां दी जा रही कव‍िता ने श्रोताओं का द‍िल लूट लिया. 

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वैसे तो सब कुछ ही अच्छा रहता है,  
लेकिन मन में दर्द छुपा सा रहता है
इस दुनिया का सबसे मुश्किल सच है ये,  
सबका पहला प्यार अधूरा रहता है

साहित्य आजतक के मंच से कवि रामायण धर द्विवेदी ने मंच पर अपनी कविताएं प्रस्तुत की. उनकी पंक्तियां 'श्रद्धा हो तो मूर्तियां भवानी बन जाती हैं, पापी की हथेलियां भी दानी बन जाती हैं...' श्रोताओं को खूब पसंद आई. उनकी कविता 'व्यर्थ पूजा श्याम की, बिन राधिका की भक्ति के' ने भी खूब वाहवाही बटोरीं. रामायण धर की कविताओं में आस्था, शक्ति और जीवन में संतुलन की गूंज स्पष्ट रूप से सुनाई दी. 

अंत में कवियत्री प्रीति त्रिपाठी ने प्रेम और रिश्तों पर भावनात्मक कविताओं से समां बांध दिया. उनकी कव‍िता 'मुस्कुरा दो तुम तो मेरी शाम बन जाये' खूब पसंद की गई. प्रीति ने जीवन में प्रेम, त्याग और महिला सशक्तिकरण के भाव भी अपनी कविताओं में छुए. 

कवि सम्मेलन के इस मंच से कवियों ने श्रोताओं के साथ संवाद भी किया. अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए जिस अंदाज से प्रस्तुति दी, तालियों की गूंज ने माहौल को और खुशनुमा बना द‍िया. 

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