Advertisement

लाइफस्टाइल

क्या है बिकनी का एटम बम से कनेक्शन, कैसे पड़ा यह नाम?

सुमित कुमार/aajtak.in
  • 05 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST
  • 1/5

आज पूरी दुनिया में इंटरनेशनल बिकनी डे सेलिब्रेट किया जा रहा है. भारत की तरह कई देशों में बिकनी शब्द को अश्लीलता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पश्चिमी देशों में इसे सामान्य पोशाक जितना ही दर्जा प्राप्त है. आइए जानते हैं कि आखिरी बिकिनी का इतिहास क्या है और इसका एटम बम से क्या कनेक्शन है.

  • 2/5

बिकिनी का चलन कोई एक दो दशक पुराना नहीं है, बल्कि रोमन साम्राज्य से ही इसे पहनने का प्रचलन है. 1700 साल पुराने एक रोमन मोजैक में बिकिनी पहने हुई महिलाओं की तस्वीर इसका साक्ष्य है. इस मोजैक का नाम चैंबर ऑफ द टेन मेडेन्स है.

  • 3/5

जैक हीम नाम के एक फ्रेंच डिजाइनर ने सबसे पहले बिकिनी का प्रोटोटाइप तैयार किया था. यह महिलाओं के अंगों को ढकने वाली एक ऐसी पोशाक थी जिसमें बेहद कम कपड़े का इस्तेमाल होता था.

Advertisement
  • 4/5

फ्रेंच डिजाइनर ने सबसे पहले इसका नाम एटम रखा था क्योंकि उस वक्त दुनियाभर में न्यूक्लियर फिजिक्स के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ रही थी और कई जगह एटम बम के परीक्षण भी हो रहे थे.

  • 5/5

एक दूसरे फ्रेंच डिजाइनर लुई रियर्ड ने बाद में स्विम सूट का निर्माण किया था. उस वक्त अमेरिका ने प्रशांत महासागर के बिकिनी एटोल द्वीप पर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था. इससे प्रेरित होकर रियर्ड ने उस द्वीप के नाम पर उस स्विमसूट को नाम दिया था बिकिनी.

picture credit: pixabay

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement