दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को होम क्वारनटीन में रहने वाले कोरोना मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर देने का ऐलान किया. केजरीवाल ने कहा कि पल्स ऑक्सीमीटर की मदद से लोग घर बैठे खून में ऑक्सीजन की जांच कर सकेंगे. आइए इसी कड़ी में आपको बताते हैं कि आखिर पल्स ऑक्सीमीटर किस तकनीक का नाम है और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है.
पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटे से डिवाइस का नाम है जो खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल और ऑक्सीजन लेवल की जानकारी देता है. डिवाइस में लगा सेंसर खून में ऑक्सीजन के जरा से बदलाव को भी डिजिटल स्क्रीन पर दिखा देता है. डिवाइस को उंगली में क्लिप की तरह फंसाया जाता है. इसके बाद इसमें लगा सेंसर खून में ऑक्सीजन के प्रवाह की जानकारी देता है.
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किन लोगों के काम आएगा पल्स ऑक्सीमीटर?
ब्ल्ड ऑक्सीजन लेवल की वजह से होने वाली बीमारियों को मॉनिटर करने में यह बेहद कारगर साबित हो सकता है. क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के अलावा अस्थमा, निमोनिया, लंग कैंसर, अनीमिया, हार्ट अटैक या हार्ट फेल जैसी गंभीर समस्याओं के लिए यह उपयोगी होगा.
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कैसे करें इस्तेमाल?
पल्स ऑक्सीमीटर रस्सी पर कपड़ों को रोककर रखने वाली क्लिप की तरह होता है, जिसे आप उंगली, कान या पैर के अंगूठे में फंसा सकते हैं. इसके बाद डिवाइस में लगी एक लाइट स्किन के अंदर प्रवेश कर खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को डिजिटल स्क्रीन पर दिखाती है. इस पूरी प्रक्रिया में रोगी को किसी तरह के दर्द का सामना भी नहीं करना पड़ता.
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हेल्थ लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि डिजिटल स्क्रीन पर ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 95 से 100 के बीच दिखाई दे तो समझ लीजिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन अगर यह 92 या उससे नीचे दिखे तो हाइपोक्सेमीयिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. इस स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
पल्स ऑक्सीमीटर की कितनी जरूरत?
कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में लोगों को होम क्वारनटीन रहने की सलाह दी जा रही है, ताकि संक्रमण के खतरे को फैलने से रोका जा सके. डॉक्टर्स भी रोगियों को गंभीर मामला होने पर ही अस्पताल जाने की सलाह दे रहे हैं. ब्लड ऑक्सीजन की जांच के लिए जिन लोगों को बार-बार अस्पताल आना पड़ता है, वे इस डिवाइस की मदद से घर बैठे जांच कर सकेंगे.