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कोरोना ने किया कंगाल, 2 डॉलर में देह-व्यापार को मजबूर हुईं यहां की महिलाएं

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कोरोना वायरस महामारी ने कोई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी है. पहले ही बड़ी मुश्किल से अपनी जिंदगी बसर करने वालों के लिए ये समय किसी त्रासदी से कम नहीं है. दक्षिणी अमेरिका के वेनेज़ुएला में रिफ्यूजी महिलाएं इन दिनों मंदी और महामारी की दोहरी मार झेल रहीं हैं. कोरोना की वजह से जहां ज्यादातर लोग घरों में हैं वहीं, यहां महिलाएं देह-व्यापार करने को मजबूर हैं.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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30 साल की लुइसा हर्नांडेज छह बच्चों की मां हैं. लुइसा कहती हैं, 'मेरे घर में कुछ भी नहीं था. अपने बच्चों को बिना कुछ खाए-पिए हुए देखना, असहनीय है. जिंदगी गुजारने के लिए हम सड़कों पर से खाना उठाकर खाते थे, ये कोई जिंदगी नहीं थी इसलिए मैंने ये काम छोड़ दिया लेकिन महामारी की वजह से हम अधर में फंस गए हैं. हम कोलंबिया में हैं और फिर से भुखमरी की स्थिति में पहुंच गए हैं. हम एक संकट से निकलकर दूसरे संकट में पहुंच गए हैं.'
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महामारी की वजह से वेनेजुएला इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है. बेरोजगारी, तबाही और खराब स्वास्थ्य सेवा की वजह से लाखों लोग देश छोड़ कर जा चुके हैं. सबसे ज्यादा असुरक्षित यहां की रिफ्यूजी महिलाएं हैं जिन्हें हिंसा, यौन शोषण और तस्करी का शिकार होना पड़ रहा है.
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कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से दक्षिण अमेरिका के सारे बॉर्डर बंद हैं जिसकी वजह से अवैध तरीके से लोगों को एक से दूसरी जगह पहुंचाने का काम भी चोरी-छिपे किया जा रहा है. वहीं कुछ लोग पैदल चलकर भी बॉर्डर पार करने को मजबूर हैं.
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कोलम्बिया में रहने वाली पाओला वर्गास कहती हैं, 'अवैध तरीके से बॉर्डर क्रॉस कराने वाले ये तस्कर बदले में मोटी रकम लेते हैं. ना तो ये कानूनी तरीका है और ना ही सुरक्षित है, खासतौर से अगर आप महिला हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आप सुरक्षित तरीके से वहां पहुंच जाएंगे.'
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वर्गास कहती हैं, 'पुरुषों को लगता है कि क्योंकि आपके पास बच्चे हैं, तो उनके पालन-पोषण के लिए आप देह-व्यापार का काम जरूर करेंगी. मेरे पास भी इस काम के बहुत प्रस्ताव हैं और मैं इससे इनकार नहीं कर सकती क्योंकि मुझे काम की जरूरत है.'
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सेक्स वर्कर रहीं करीना ब्रावो अब महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहीं हैं. ब्रावो का कहना है, 'महामारी की वजह से सेक्स वर्कर्स की हालत चिंताजनक हो गई है. क्वारंटीन की वजह से वो इतने पैसे नहीं कमा पा रहीं है कि अपने परिवार और खुद के लिए जरूरी इंतजाम कर सकें.'
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ब्रावो का कहना है कि वेनेजुएला की ज्यादतर रिफ्यूजी महिलाएं अपने घर पैसे भेजती हैं. दो साल पहले तक उन्हें वेश्यावृति के काम के लिए 9 डॉलर(675 रुपए) तक की पेशकश की जाती थी. उन्होंने कहा, 'मैं वेनेजुएला के कई ऐसी सेक्स वर्कर्स को जानती हूं जो इस महामारी में जिंदा रहने के लिए 2 डॉलर (150 रुपए) तक में भी काम कर रहीं हैं.'
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लॉकडाउन के दौरान, वेनेजुएला के ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और उनके पास आय का कोई जरिया भी नहीं है ताकि वो खाना खरीद सकें या घर का किराया दे सकें.

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इक्वाडोर के केयर इंटरनेशनल NGO के डायरेक्टर एलेक्जेंड्रा मोनकाडा का कहना है,  'महामारी की वजह से सिर्फ इक्वाडोर से ही हर रोज 400 लोग देश छोड़ कर बाहर जा रहे हैं. घर का किराया ना दे पाने की वजह से लोग अपने परिवार के साथ सड़कों पर सोने को मजबूर हैं, इनमें गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. स्थितियां बद से बदतर हो चुकी हैं.'
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यहां की एक सेक्स वर्कर ने कहा, 'वेनेजुएला की शरणार्थी महिलाओं को सेक्स वर्क के लिए मजबूर किया जाता है और इस महामारी के दौरान हमारे पास इस को काम जारी रखने का कोई विकल्प नहीं है.' इक्वाडोर में अप्रैल के महीने में क्वारंटीन को अनिवार्य कर दिया गया था लेकिन मई में वेनेजुएला के रेड लाइट एरिया की लड़कियों और महिलाओं को बाहर निकालकर उनसे क्लाइंट ढूंढने को कहा जा रहा है.'
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एक अन्य सेक्स वर्कर ने कहा, 'हमारे लिए मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं, खाने की कमी है, हम मानसिक दबाव में रहते हैं और हमें कई तरह की हिंसाएं झेलनी पड़ती हैं. हमारी स्थिति बदतर है और हमें मदद की जरूरत है.'
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