Cooking Science: मिट्टी के चूल्हे पर रखे बर्तन की तली काली हो जाती है जब कि गैस पर रखे बर्तन की नहीं? आखिर क्या है कारण

क्या आपने कभी गौर किया है कि चूल्हे पर खाना बनाते वक्त बर्तन काले क्यों हो जाते हैं, जबकि गैस पर ऐसा नहीं होता? इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि आग और गैस की केमिस्ट्री में क्या फर्क है और बर्तन क्यों काले पड़ जाते हैं.

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मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाते समय बर्तन के नीचे कालिख जम जाती है. (Photo: AI Generated) मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाते समय बर्तन के नीचे कालिख जम जाती है. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

Cooking Science: आज के समय में मिट्टी के चूल्हों की जगह रसोई जैस ने ले ली है. लेकिन कई जगह या गांव में अभी भी मिट्टी के चूल्हे पर ही खाना बनता है. लेकिन क्या आपने नोटिस किया है कि जब खाना गैस चूल्हे पर बनता है तो उस पर रखे बर्तन की तली साफ रहती है लेकिन वही बर्तन अगर मिट्टी या लकड़ी के चूल्हे पर रख दिया जाए तो वह तुरंत काला पड़ जाता है? बहुत से लोग इसे बर्तन की क्वालिटी मान लेते हैं तो कुछ इसे धुआं मान लेते हैं. लेकिन इसके पीछे पूरी तरह से साइंस का खेल है. तो आइए इस बारे में जान लीजिए, ऐसा क्यों होता है. 

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इनकंप्लीट कम्बशन है मुख्य कारण

बोकास्मोकएंडसूट.यूएस के मुताबिक, बर्तन का काला होना और न होना कम्बशन यानी दहन की प्रक्रिया पर निर्भर करता है कि ईंधन कैसे जल रहा है और उसे कितनी ऑक्सीजन मिल रही है. वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो बर्तन का काला होना 'इनकंप्लीट कम्बशन' का नतीजा है. जब लकड़ी या कोयला जलता है तो उसे पूरी तरह जलने के लिए जितनी ऑक्सीजन चाहिए, उतनी नहीं मिल पाती.

ऐसे में लकड़ी में मौजूद कार्बन के कण पूरी तरह से जल नहीं पाते और धुएं के रूप में ऊपर उठते हैं. ये कण बर्तन की ठंडी तली के संपर्क में आते ही चिपक जाते हैं, जिससे वहां कार्बन की एक काली परत जम जाती है. इसी प्रक्रिया को हम सूट (Soot) या कालिक कहते हैं.

गैस चूल्हे पर ऐसा क्यों नहीं होता?

दरअसल, एलपीजी (LPG) गैस का बर्नर इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि गैस और हवा (ऑक्सीजन) का मिश्रण एकदम सही अनुपात में हो. ऐसे में जब गैस चूल्हे पर नीला फ्लेम जलता है तो इसका मतलब है कि वहां कंप्लीट कम्बशन हो रहा है यानी पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है, ईधन पूरी तरह जल रहा है.

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इसके कारण कार्बन के कण नहीं बनते और बर्तन साफ रहते हैं. लेकिन अगर कभी आपका गैस चूल्हा पीली लौ देने लगे तो समझ जाइए कि बर्नर में कचरा है और अब पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है जिससे बर्तन काले होने लगेंगे. 

नमी और हवा का खेल

लकड़ी के चूल्हे पर बर्तन काले होने की एक और बड़ी वजह लकड़ी में मौजूद नमी है. यदि आपकी लकड़ी सूखी नहीं है तो जलते वक्त वह ज्यादा धुआं और कम गर्मी पैदा करती है. नमी होने की वजह से तापमान कम रहता है और ईंधन पूरी तरह बर्न नहीं हो पाता जिससे ज्यादा कालिक बनती है.

वहीं इसके विपरीत गैस में ऐसा कोई लिक्विड या मॉइश्चर का झंझट नहीं होता जिससे बर्निंग प्रोसेस हमेशा क्लीन बनी रहती है और बर्तन काले नहीं होते.  

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