'फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी...' भोजपुरी लोकगीत को कई बॉलीवुड मूवीज में देखा जा चुका है और अब यह गाना धमाल-4 में भी दिखने वाला है. यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक काफी फेमस और स्वादिष्ट डिश की कहानी भी है. दरअसल, उत्तर भारत से लेकर कैरेबियन देशों तक अपनी पहचान बना चुकी फुलौरी (Pholourie) असल में बेसन या पिसी हुई पीली मटर की दाल से तैयार होने वाला एक सॉफ्ट और स्पंजी स्नैक है.
चटपटी चटनी के बिना इस डिश का अस्तित्व अधूरा माना जाता है क्योंकि इसे चटनी के साथ खाने से इसका टस्ट कई गुना बढ़ जाता है. तो आइए इस डिश का इतिहास जान लीजिए.
उत्तर भारत से वेस्टइंडीज तक ऐसे पहुंची
19वीं सदी में जब भारत से गिरमिटिया मजदूर गन्ने के खेतों में काम करने के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में गए तो वे अपने साथ इस पारंपरिक रेसिपी को भी ले गए थे. विदेशी धरती पर स्थानीय मसालों के साथ मिलकर यह डिश वहां के स्ट्रीट फूड का मुख्य हिस्सा बन गई.
आज यह इंडो-कैरेबियन कल्चर की पहचान बन चुकी है. कुछ रिपोर्ट दावा करती कि यह भारतीय पकोड़ा विदेशी जमीन पर जाकर 'फुलौरी' के रूप में वहां के लोगों का पसंदीदा स्नैक बन गया है.
क्यों कहा जाता है इसे चटनी के बिना अधूरा?
दरअसल, खाने के शौकीनों के लिए फुलौरी का असली मजा तीखी और खट्टी चटनी के साथ ही आता है. पारंपरिक रूप से इसे इमली या कच्चे आम की चटनी के साथ सर्व किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फूड कॉम्बिनेशन को काफी पसंद किया जाता है.
रेसिपी और फूड गाइड वेबसाइट्स के मुताबिक, किसी भी पकोड़े या डीप-फ्रीड स्नैक को परफेक्ट बनाने के लिए उसका अंदर से सॉफ्ट और बाहर से क्रिस्पी होना जरूरी है और सही चटनी इसके स्वाद को दोगुना कर देती है. यही वजह है कि लोकगीतों में भी इसे चटनी के बिना अधूरा बताया गया है.
कैसे बनती है फुलौरी?
फुलौरी को बनाने के लिए बेसन या मटर की दाल के गाढ़े बैटर में लहसुन, हल्दी, जीरा और हरी मिर्च का पेस्ट मिलाया जाता है. बैटर को फ्लफी बनाने के लिए इसमें थोड़ा सा बेकिंग सोडा डाला जाता है. इसके बाद तेल में इसकी छोटी-छोटी गोलियां डीप-फ्राई की जाती हैं. जैसे ही ये तेल में जाती हैं फूलकर स्पंज जैसी सॉफ्ट हो जाती हैं. बस आपकी फुलौरी तैयार है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क