Fermented Fish Chutney: मछली को सुखाकर बनाई जाती है ये खास चटनी! पेट के लिए वरदान, जानें फायदे

मेघालय के पहाड़ों से निकली तुंगटप चटनी सिर्फ स्वाद का तड़का नहीं, बल्कि पेट की सेहत सुधारने और सर्दियों में शरीर को गर्म रखने का सदियों पुराना आयुर्वेदिक नुस्खा है.

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मछली की चटनी पेट के लिए फायदेमंद मानी जाती है. (Photo: AI Generated) मछली की चटनी पेट के लिए फायदेमंद मानी जाती है. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

Sukhi machli ki chatni: भारत के नॉर्थ-ईस्ट इलाका अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ अपने अनोखे खान-पान के लिए भी जाना जाता है. मेघालय की ऐसी ही एक पारंपरिक डिश है तुंगटप (Tungtap). ये डिश असल में एक फर्मेंटेड (खमीर उठी हुई) ड्राई फिश चटनी है. यह चटनी खासी और जयंतिया समुदाय के घरों में बेहद चाव से खाई जाती है. स्थानीय लोग इसे उबले हुए चावल और स्थानीय मसालों के साथ सर्व करते हैं. पहली बार में इसका तीखा और तेज महक वाला स्वाद आपको अजीब लग सकता है लेकिन यह वहां की संस्कृति का एक बेहद अहम हिस्सा है.

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खराब मौसम से निपटने की तकनीक

नॉर्थ-ईस्ट के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और कड़ाके की सर्दियों के दौरान ताजा खाना या ताजी मछलियां मिलना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. इस भौगोलिक मजबूरी के कारण ही सदियों पहले आदिवासियों ने मछलियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का तरीका खोजा.

ऐतिहासिक रूप से, पूल बार्ब (Pool Barb) जैसी छोटी स्थानीय मछलियों को धूप में सुखाकर, नमक के साथ मिट्टी के बर्तनों में महीनों तक फर्मेंट होने के लिए रख दिया जाता था. यही तकनीक आज तुंगटप के रूप में मेघालय की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है.

पेट की सेहत के लिए है वरदान

यह अनोखी चटनी स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IJSRST) की रिसर्च के मुताबिक, फर्मेंटेशन की वजह से तुंगटप में भारी मात्रा में गुड बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं. यह प्रोबायोटिक्स हमारे पेट के डाइजेशन सिस्टम को मजबूत करते हैं और गट हेल्थ को सही रखते हैं. इसके अलावा यह चटनी प्रोटीन, कैल्शियम और जरूरी फैटी एसिड्स का भी एक बहुत अच्छा सोर्स मानी जाती है.

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ठंडे मौसम में शरीर को रखती है गर्म

मेघालय के ठंडे और नमी वाले मौसम में तुंगटप चटनी शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है. इसे बनाने में स्थानीय लाल मिर्च और खास सिचुआन पेपर का इस्तेमाल होता है, जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करते हैं. रिसर्च गेट में पब्लिश्ड स्टडी बताती है कि इस पारंपरिक विधि से तैयार भोजन न केवल पोषक तत्वों को आसानी से पचाने में मदद करता है, बल्कि सर्दियों में शरीर को अंदरूनी ताकत और गर्मी भी देता है.

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