जापान में 'भूतिया' घर खरीदने के लिए लाइन लगा रहे लोग! जानिए क्या है असली वजह

जापान में आसमान छूती महंगाई ने लोगों की सोच बदल दी है. अब वहां 'हॉन्टेड' घरों में रहने से लोग डर नहीं रहे बल्कि इसे बजट में घर खरीदने का सुनहरा मौका मान रहे हैं. आखिर इसके पीछे की असल वजह क्या है, इस बारे में जान लीजिए.

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जापान में रिअल स्टेट मार्केट में एक नया ट्रेंड देखने मिल रहा है. (Photo: AI Generated) जापान में रिअल स्टेट मार्केट में एक नया ट्रेंड देखने मिल रहा है. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

जापान की रियल एस्टेट मार्केट में इन दिनों एक अजीबोगरीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है. जिन घरों को कभी लोग हॉन्टेड या अशुभ मानकर खरीदने से कतराते थे, आज वही घर लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं. इन्हें जापान में जिको बुकेन (Jiko Bukken) कहा जाता है यानी वे प्रॉपर्टीज जहां कभी आत्महत्या, हत्या या किसी अकेले व्यक्ति की मौत हुई हो. दशकों से जापानी समाज में इन घरों को आध्यात्मिक रूप से सही नहीं माना जाता था लेकिन अब इनकी डिमांड जोरों पर है.

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महंगाई का असर

आज के समय में जापान में रहने की लागत इतनी बढ़ गई है कि आम लोगों के लिए अच्छे घरों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोक्यो जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं. ऐसे में जिको बुकेन घरों के भारी डिस्काउंट जो अक्सर बाजार भाव से 20 से 50 प्रतिशत तक कम होते हैं और बजट-फ्रेंडली खरीदारों और इन्वेस्टर्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं.

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अब लोग अंधविश्वास से ज्यादा अपनी जेब को अहमियत दे रहे हैं. जो युवा पीढ़ी पहले इन बातों से घबराती थी, वह अब इसे एक स्मार्ट फाइनेंशियल फैसला मान रही है.

जापान में इस बदलते ट्रेंड को लोकप्रिय बनाने में कॉमेडियन तानीशी मात्सुबारा का नाम सबसे ऊपर आता है जिन्होंने पिछले एक दशक से अधिक समय से जानबूझकर ऐसी ही प्रॉपर्टीज में रहकर इस डर को एक नए नजरिए से पेश किया है. 

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द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, मात्सुबारा ने इन घरों में रहने को अपने करियर का हिस्सा बना लिया है और वे लगातार ऐसी जगहों पर रहते हैं जहां कोई दर्दनाक मौत हुई थी. 

बढ़ती महंगाई और महंगे होते रेंट के दौर में, जापानी युवा अब अंधविश्वास या पुराने टैबू के बजाय अपनी आर्थिक जरूरतों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं.

डेमोग्राफी भी जिम्मेदार

जापान की बदलती डेमोग्राफी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है. वहां बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है और कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं जिनकी मौत का पता कई दिनों बाद चलता है. इस तरह के सोशल आइसोलेटेड डेथ्स की बढ़ती घटनाओं ने इन स्टिग्माटाइज्ड घरों की संख्या में इजाफा किया है.

CTV News के मुताबिक, जापान की नेशनल पॉलिसी एजेंसी का कहना था कि जापान में अकेले रहने वाले लोगों की मौतों के मामले बढ़े हैं जिससे ऐसे घरों की सप्लाई भी बढ़ गई है.

नए बिजनेस की बढ़ी डिमांड

इस बढ़ती डिमांड के साथ ही जापान में एक नई इंडस्ट्री भी फल-फूल रही है. अब कई कंपनियां ऐसी हैं जो इन घरों के 'शुद्धिकरण' का काम करती हैं.

जापान में स्टिग्माटाइज्ड प्रॉपर्टीज की सफाई और रिनोवेशन करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक निक्केई मार्क्स के प्रेसिडेंट हानाहारा कोजी हैं. वे भी ऐसी प्रॉपर्टीज को रिहैबिलिटेट करके दोबारा मार्केट में लाने का काम करते हैं. उनकी कंपनी द्वारा बौद्ध भिक्षुओं से विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं ताकि 'भटकती आत्माओं' को शांति मिले और घर को रहने लायक बनाया जा सके.

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कुछ रियल एस्टेट एजेंट तो बाकायदा थर्मल कैमरे और सेंसर का उपयोग करके यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि घर में कोई भूतिया गतिविधि नहीं है. द जापान टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि कई स्टार्टअप अब सिर्फ इन्हीं प्रॉपर्टीज को मैनेज और रिनोवेट करने का काम कर रहे हैं जिससे निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिल रहा है.

हालांकि, यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है. जापानी संस्कृति में युरेई (आत्माओं) का डर काफी गहरा है, लेकिन आर्थिक दबावों ने इस डर पर जीत हासिल कर ली है. अब लोग इन घरों को केवल एक भूतिया जगह के रूप में नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी मार्केट में एंट्री करने के एक सस्ते विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. यह साबित करता है कि जब बात घर की छत की आती है तो आज की पीढ़ी पुरानी कहानियों के बजाय प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस पर ज्यादा भरोसा कर रही है.

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