प्रदूषण से अस्थमा के मरीजों में 3 गुना बढ़ोतरी, ऐसे रखें ख्याल

दिल्ली में प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर के कारण हालात गंभीर होते जा रहे हैं. प्रदूषण का लोगों की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. आइए जानें एसे में सेहत का ख्याल कैसे रखें....

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दिल्ली का प्रदूषण दिल्ली का प्रदूषण

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 11 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है. हवा गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार नोएडा में हवा की गुणवत्ता गिर कर 444 एक्यूआई के गंभीर स्तर पर आ गई है. इसका बुरा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. सांस की बीमारियों, आंखों और त्वचा के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है.

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नोएडा के जेपी अस्पताल में पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञानेन्द्र अग्रवाल ने कहा इस मौसम में प्रदूषण के इस स्तर के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है और यह संख्या और यदि प्रदूषण में सुधार नहीं हुआ तो यह संख्या और भी बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा, "ऐसे समय में यथासंभव घर के अंदर ही रहें. आउटडोर गतिविधियां जैसे रनिंग, जॉगिंग, साइक्लिंग, जिम आदि न करें. नवंबर से जनवरी के बीच सुबह के समय घर से बाहर न जाएं. धूल की एलर्जी से बचने के लिए अपने मुंह को से ढक कर रखें."

उन्होंने कहा, "अस्थमा के मरीज अपने साथ हमेशा इन्हेलर रखें. अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनें, जो पीएम 2.5 को फिल्टर कर सके, ताकि आपके फेफड़ों पर स्मॉग का असर न हो. सांस लेने में परेशानी हो तो भाप लें. विटामिन सी, ई और बीटा-कैरोटीन का सेवन करें, इससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. अगर आपको कोई भी परेशानी हो तुरंत की सलाह लें."

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डॉ. अग्रवाल ने कहा, "वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियां और यहां तक कि अपंगता भी हो सकती है. यह ब्रोंको स्पाज्म, साइनसाइटिस, सांस की बीमारियों का कारण बन सकता है. सांस के साथ अधिक मात्रा में कार्बन के शरीर में जाने से व्यक्ति थकान महसूस करने लगता है."

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि घर के भीतर कीको साफ करने के लिए प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगा सकते हैं, जैसे मनी प्लांट, एलो वेरा और स्पाइडर प्लांट. ये सभी पौधे अपने आस-पास की हवा को साफ करते हैं. घर में केमिकल फ्रेशनर या क्लीनर का इस्तेमाल न करें, इसके अलावा बंद कमरे में मोमबत्ती या धुंए वाली चीजें न जलाएं.

उन्होंने कहा कि घर की खिड़कियों को खोल कर रखें, ताकि हवा का सुगम संचार होता रहे और एसी के फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें, ताकि कमरे में आने वाली हवा में धूल न हो. डॉ. अग्रवाल ने कहा कि घरों में अच्छे प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं, और कार में बैठने से पहले कुछ देर के लिए खिड़कियां खोल दें, ताकि ताजा हवा भीतर आ जाए. कार के एसी को इन्डोर मोड में रखें.

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