अमेरिका में सरसों के तेल की बोतल पर External Use Only क्यों लिखा होता है?

अमेरिका में सरसों के तेल की बोतलों पर अक्सर External Use Only लिखा होता है. इसकी वजह तेल में मौजूद इरुसिक एसिड और उससे जुड़े अमेरिकी फूल रुल्स  हैं. हालांकि भारत समेत कई देशों में सरसों का तेल लंबे समय से खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अमेरिका में इसे फूड ऑयल के रूप में व्यापक मंजूरी नहीं मिली है,

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आज तक इंसानों में सामान्य मात्रा में सरसों के तेल का उपयोग करने से गंभीर नुकसान के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं. ( Photo: Instagram/@chillout_1588_usa) आज तक इंसानों में सामान्य मात्रा में सरसों के तेल का उपयोग करने से गंभीर नुकसान के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं. ( Photo: Instagram/@chillout_1588_usa)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST

भारत, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में सरसों का तेल खाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अगर आप अमेरिका में सरसों के तेल की बोतल खरीदें, तो उस पर अक्सर For External Use Only (केवल बाहरी उपयोग के लिए) लिखा दिखाई देगा. इसे देखकर कई भारतीय हैरान हो जाते हैं, क्योंकि भारत में यही तेल रसोई का अहम हिस्सा है. आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे एक दिलचस्प साइंटिफिक और कानूनी कारण है.

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क्या है इसकी मुख्य वजह?
सरसों के तेल में Erucic Acid (इरुसिक एसिड) नाम का एक फैटी एसिड पाया जाता है. 1970 के दशक में वैज्ञानिकों ने चूहों और कुछ अन्य जानवरों पर स्टडी किए थे. इन स्टडी में पाया गया कि यदि जानवरों को बहुत अधिक मात्रा में Erucic Acid दिया जाए, तो उनके हार्ट के मसल में फाट जमा होने जैसे प्रभाव देखे जा सकते हैं. इसी आधार पर अमेरिका और कुछ अन्य देशों की नियामक एजेंसियों ने सावधानी बरतते हुए इरुसिक एसिड के सेवन को लेकर नियम बनाए.

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात है कि इन पशु-अध्ययनों के परिणाम इंसानों में उसी तरह साबित नहीं हुए हैं. दशकों से भारत, बांग्लादेश और अन्य देशों में करोड़ों लोग सरसों का तेल खाते आ रहे हैं, लेकिन सामान्य मात्रा में सरसों के तेल के सेवन से इंसानों में गंभीर हृदय रोग होने के ठोस और निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक समुदाय में यह विषय पूरी तरह काला-सफेद नहीं है. अमेरिका ने सावधानी को देखते हुए एसे अपनाया, जबकि भारत और कई अन्य देशों ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सरसों के तेल के उपयोग की अनुमति दी. 

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अमेरिका में खाने के लिए मंजूरी क्यों नहीं?
अमेरिका की U.S. Food and Drug Administration (FDA) ने पारंपरिक सरसों के तेल को खाना पकाने के तेल के रूप में व्यापक स्वीकृति नहीं दी है. इसी वजह से कई प्रोडक्ट को इसे एडिबल ऑयल के बजाय मसाज ऑयल या बाहरी उपयोग वाले प्रोडक्ट के रूप में बेचना पड़ता है. यही कारण है कि बोतल पर एक्सटर्नल यूज़ ओनली लिखा होता है. यह लिखना कानूनी आवश्यकता बन जाता है. इसका मतलब यह नहीं है कि तेल जहरीला है, बल्कि यह अमेरिकी खाद्य नियमों का पालन करने के लिए किया जाता है.

भारत में तो लोग वर्षों से खा रहे हैं, फिर क्या?
भारत में सरसों का तेल सदियों से भोजन का हिस्सा रहा है करोड़ों लोग इसका उपयोग सब्जी, अचार, मछली, पराठे और अन्य व्यंजनों में करते हैं. भारतीय खाद्य मानकों के अनुसार सरसों का तेल खाने योग्य माना जाता है और इसकी बिक्री वैध है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य मात्रा में सरसों के तेल का सेवन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है. इसके अलावा इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, मोनोअनसैचुरेटेड फैट और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं.

क्या अमेरिका में कोई भी सरसों का तेल नहीं खा सकता?
अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय सरसों का तेल खरीदते और इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन कई उत्पादों पर रेग्युलेटरी रीजन से एक्सटर्नल यूज़ ओनली लिखा रहता है. कुछ विशेष रूप से प्रोसेस किए गए या कम इरुसिक एसिड वाले उत्पाद अलग नियमों के तहत उपलब्ध हो सकते हैं.

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क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है?
आज तक इंसानों में सामान्य मात्रा में सरसों के तेल का उपयोग करने से गंभीर नुकसान के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं. हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित आहार और किसी भी तेल का सीमित उपयोग करने की सलाह देते हैं. जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें अपने डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.

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