क्या आप जानते हैं अमेरिका में क्यों नहीं बनती जींस? ये है इसकी वजह

डेनिम और जींस का आविष्कार ही अमेरिका में हुआ था. जींस बनाने वाली पहली फैक्ट्री भी वहीं खुली थी. अमेरिका की वजह से ही दुनिया में जींस का नाम हुआ और आज यह सबसे पॉपुलर परिधान माना जाता है. किसी समय सिर्फ अमेरिका में ही जींस और डेनिम बनती थी, लेकिन आज वहां इसका उत्पादन बंद हो गया है. ऐसे में समझते हैं कि आखिर इसकी वजह क्या है.

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अमेरिकी जींस की दुनियाभर में धूम है, जबकि वहां इसका उत्पादन ही नहीं होता (Photo - AI Generated) अमेरिकी जींस की दुनियाभर में धूम है, जबकि वहां इसका उत्पादन ही नहीं होता (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

कभी अमेरिका दुनिया में डेनिम बनाने वाला सबसे बड़ा देश था, लेकिन अब यहां जींस नहीं बनती है.  पहली जींस भी यहीं बनी थी. अमेरिका से निकलकर ही जींस पूरी दुनिया में छा गया. एक समय ऐसा था कि अमेरिका में सबसे ज्यादा जींस का उत्पादन होता था. सिर्फ वहीं जींस की फैक्टरियां थीं. फिर कुछ ऐसा हुआ कि अब वहां जींस बनना बंद हो गए. डेनिम की सभी मिलें ठप हो गई. आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिस अमेरिका ने जींस का आविष्कार किया, वहीं इसकी मैन्युफैक्चरिंग बंद हो गई. 

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अमेरिका में जींस के बढ़ते क्रेज के साथ यह दुनियाभर में फैलने लगा. इसके बाद डेनिम की मिले अमेरिका से बाहर भी खुलने लगीं. दूसरे देशों में जींस का उत्पादन तेजी से बढ़ने लगा.  विदेशों की सस्ती फैक्टरियों से दशकों तक चली टक्कर के बाद, जिस देश ने जींस को मशहूर किया, वहां धीरे- धीरे डेनिम की मिलें बंद होने लगी. आज के समय में अमेरिका में एक- दो को छोड़कर जींस बनाने वाली यूनिटें बंद हो चुकी हैं और डेनिम की लगभग सभी मिलें खत्म हो गई हैं. क्यों और कैसे अमेरिका में जींस बनना बंद हो गए, यह जानने के लिए इस अमेरिकी जींस फैक्ट्री के संचालक बात समझना जरूरी है. 

इस कहानी से समझें पूरे मामला 
अमेरिका के ओक्लाहोमा के शांत कस्बे शॉनी में सिलाई मशीनों की तेज आवाज, अमेरिका के बचे हुए कुछ कपड़ों के कारखानों में से एक से आज भी आती है. यहां अंदर, 100% अमेरिकी कपास से बने डेनिम को हाथ से काटकर जींस बनाए जाते हैं. हर जींस पर "मेड इन यूएसए" का टैग लगा होता है.

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इस कारखाने के मालिक एंटोश ने बताया एनबीसी न्यूज को एक इंटरव्यू में बताया था कि कंपनी राउंड हाउस जीन्स का पहला लक्ष्य किफायती अमेरिकी जीन्स बनाना है, जिसे आम अमेरिकी खरीद सके. यह कंपनी अपनी डेनिम पैंट और जींस की कीमत मात्र 70 डॉलर रखने की कोशिश करती है. एंटोश कहते हैं कि वे अपने कर्मचारियों को बाजार दर से अधिक वेतन देते हैं. यह एक ऐसा लक्ष्य है जिसकी लागत बहुत अधिक है और लाभ कम.

एंटोश ने स्वीकार किया कि वह बांग्लादेश में सिले हुए जींस भी काफी अधिक मुनाफे पर बेचता है. उन्होंने कहा कि विदेशों में बनने वाले अमेरिकी जींस से होने वाला अधिक मुनाफा उनके अमेरिका निर्मित उत्पादों की कीमत को कम करने और  उनके कारखाने का खर्च उठाने में मदद करता है. 

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राउंड हाउस द्वारा बेची जाने वाली अमेरिकी जींस 70 डॉलर में बिकती है. इस पर 5% या उससे कम का मार्जिन होता है, यानी इसकी उत्पादन लागत 66 डॉलर से अधिक होती है. वहीं परिधान खुदरा विक्रेता आमतौर पर उत्पादों पर कम से कम 30% मार्जिन का लक्ष्य रखते हैं. इसके विपरीत, बांग्लादेश में सिले हुए उनकी ही कंपनी के जींस, जो अभी भी 100% अमेरिकी कपास से बने होते हैं, 40 डॉलर प्रति जोड़ी के हिसाब से बिकते हैं, जो अमेरिका में बने जींस की कीमत से लगभग आधी है, लेकिन 20% का कहीं अधिक मार्जिन देते  हैं.

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एंटोश ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती सिलाई कर्मचारियों की टीम तैयार करना है. अमेरिका में बहुत कम कपड़ा कंपनियां बची होने के कारण अनुभवी कर्मचारी मिलना मुश्किल है. वह हर नए कर्मचारी को शुरू से ट्रेनिंग देते हैं, जिसमें महीनों या सालों लग सकते हैं, तब जाकर वे पूरी तरह से कुशल हो पाते हैं. आज अमेरिका में जींस सिलने वाले और डेनिम फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर ही नहीं हैं और जो हैं उनकी मजदूरी बहुत ज्यादा होती है. इस वजह से अमेरिका में अब जींस नहीं बन रहे. 

अमेरिका की इस जींस फैक्ट्री की कहानी सिर्फ बानगी भर है. पूरे देश का यही हाल है.   एक सर्वेक्षण के अनुसार , 2022 के बाद से "मेड इन यूएसए" का आकर्षण अमेरिका के लोगों में कम हो गया है. क्योंकि, अमेरिकी अब इसे बढ़ती कीमतों से जोड़ते हैं. अमेरिका में अभी भी जो जींस बन रही है, उसकी कीमत काफी ज्यादा होती है और उसी ब्रांड की जींस जो बाहर से बनकर आती है, उनकी क्वालिटी भी सेम होती है और कीमत काफी कम होती है. 

अमेरिकी कंपनियां अब भी बना रही जींस, लेकिन...
अमेरिका में डेनिम की मिलें बंद होने और जींस का उत्पादन ठप होने का मतलब ये नहीं है कि इस काम से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों और कारोबारियों ने अपना बिजनेस ही समेट लिया. जींस बनाने वाली बड़ी- बड़ी नामी गिरामी कंपनियों ने जींस मैन्युफैक्चरिंग और डेनिम की मिलों को दूसरे देशों में शिफ्ट कर दिया है. जहां इसे बनाने में लगने वाली लागत और मजदूरी काफी कम होती है. 

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जींस अभी भी अमेरिका में बनती हैं , लेकिन अमेरिका में बिकने वाले कपड़ों में उनकी हिस्सेदारी 2% से भी कम है. श्रम लागत कम करने, मुनाफा बढ़ाने और ऐतिहासिक व्हाइट ओक प्लांट जैसी घरेलू कपड़ा मिलों के बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए ब्रांडों ने 1980 और 90 के दशक में उत्पादन को विदेशों और मैक्सिको में शिफ्ट कर दिया.

आज अमेरिका की जींस बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट वैसे देशों में शिफ्ट कर दिया है, जहां सस्ते मजदूर और कम लागत में काम हो जाता है.  आज अमेरिका में कुशल वस्त्र निर्माण महंगा हो गया है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर सिले हुए जींस की खुदरा कीमत बड़े पैमाने पर उत्पादित इम्पोर्टेड जींस की तुलना में अधिक हो जाती है.

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2017 में कोन मिल्स के ऐतिहासिक व्हाइट ओक प्लांट के बंद होने से - यह पता चला कि असली अमेरिकी निर्मित सेल्वेज डेनिम का उत्पादन वहां लगभग पूरी तरह से बंद हो गया. अब बड़े उत्पादकों ने सप्लाई चेन की आउटसोर्सिंग कर ली है. लेवीज जैसे प्रमुख ब्रांड, जिन्होंने अमेरिकी ब्लू जींस का निर्माण किया, इन्होंने अपने कारखानों और सप्लाई चेन को  मैक्सिको, भारत, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों में शिफ्ट कर  दिया है.

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अमेरिका में आज स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां जींस बनाने वाली कंपनियों को सस्ते और कुशल मजदूर नहीं मिल रहे. दशकों से सस्ती मजदूरी और कम लागत के चक्कर में अमेरिकी जींस कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भारत, चीन, बांग्लादेश जैसे देशों में शिफ्ट कर दिया है. यहां अमेरिकी कपास से बने डेनिम से ही विशुद्ध अमेरिकी जींस बन रहे हैं, लेकिन अमेरिका में अब कोई मेन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है. 

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