आज से करोड़ों साल पहले धरती पर बड़े- बड़े विशालकाय जानवर रहा करते थे. इंसानों के अस्तित्व से पहले डायनासोर जैसे राक्षसकाय जीव- जंतुओं का इस दुनिया में राज था. उसी समय भारत में दुनिया का सबसे विशालाकय सांप घूमता था. कुछ समय पहले ही वैज्ञानिकों ने एक खोज के बाद ऐसा दावा किया है.
हालांकि, धरती पर अब तक का सबसे बड़ा विशालकाय सांप टाइटनोबोआ को माना जाता है दो आज से करोड़ों वर्ष पहले अफ्रीका और यूरोप में रेंगता रहता था. यह अब तक का सबसे बड़ा सांप था. अब वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं को कभी भारत की धरती पर टाइटनोबोआ से भी बड़े और विशाल सांप के अस्तित्व का प्रमाण मिला है. अपनी विशालता में इसने धरती के सबसे विशालकाय सांप को भी पीछे छोड़ दिया.
एक अनुमान के मुताबिक, टाइटनोबोआ की लंबाई 50 फीट और चौड़ाई 3 फीट थी. यह सांप दुनिया के पहले उष्णकटिबंधीय वर्षावन के शिकारी थे, जो 65 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर के विलुप्त होने के बाद अस्तित्व में थे. वहीं भारत में मिले सबसे बड़े प्रागैतिहासिक सांप के अवशेष ने टाइटनोबोआ को पछाड़ दिया है जिसे लंबे समय से अब तक का सबसे बड़ा सांप माना जाता था.
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दरअसल, भारत के गुजरात में एक विशालकाय सांप की रीढ़ की हड्डी का एक हिस्सा मिला है. इसका नाम 'वासुकी इंडिकस' रखा गया है. कुल मिलाकर इसकी 27 हड्डियां मिलीं हैं. इनमें से ज्यादातर अच्छी तरह से संरक्षित हैं. ये हड्डियां अन्य सांपों के जीवाश्मों की तुलना में काफी बड़ी हैं. प्रत्येक हड्डी की लंबाई 1.48 से 2.47 इंच और चौड़ाई 2.46 से 4.39 इंच है. इससे पता चलता है कि जीवित अवस्था में इस सांप का शरीर मोटा और बेलनाकार था.
शोधकर्ताओं ने गणना की कि सांप की लंबाई 49.9 फीट थी. ऊपरी अनुमान के अनुसार, यह अब तक खोजे गए सबसे बड़े सांप टाइटनोबोआ से भी लंबा है. ऐसे में अब वैज्ञानिक कभी धरती पर पाए जाने वाले सबसे बड़े सांप के दर्जे को लेकर अलग नजरिए से देख रहे हैं.
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वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत कभी दुनिया के सबसे बड़े सांप का घर था. वासुकी इंडिकस जैसे सांप भारत में यहां- वहां घूमते रहे होंगे, जो दुनिया के दूसरे हिस्से में अपने समकालीन टाइटनोबोआ से कहीं ज्यादा बड़े और भारी-भरकम विशालकाय जीव थे.
वैज्ञानिकों को पूरा विश्वास है कि यह विशालकाय जीव लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले इओसीन काल में रहता था. इस काल में धरती का औसत तापमान लगभग 82°F था. इसका जीवाश्म पश्चिमी भारत के गुजरात कच्छ में स्थित लिग्नाइट खदान से मिले एक पत्थर में मिला है.
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