दुबई का नाम आते ही आंखों के सामने गगनचुंबी इमारतें, लग्जरी लाइफ और 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की झुलसा देने वाली गर्मी की तस्वीर उभरती है. ऐसे शहर में एसी के बिना रहना लगभग नामुमकिन लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुबई के पुराने मोहल्लों में आज भी ऐसे घर मौजूद हैं, जो बिना एसी के भी काफी हद तक ठंडे रहते हैं? इसकी वजह हैं सदियों पुरानी कुछ अनोखी तकनीकें, जिन्हें बरजील, मशराबिया और सिक्का कहा जाता है.
दुबई के पुराने इलाके अल फहीदी हिस्टोरिकल नेबरहुड की गलियों में कदम रखते ही फर्क महसूस होने लगता है. बाहर तपती धूप और झुलसाती गर्मी होती है, लेकिन इन संकरी गलियों में हवा ठंडी और माहौल अपेक्षाकृत आरामदायक लगता है. हैरानी की बात यह है कि यह सब आधुनिक तकनीक नहीं, बल्कि 200-300 साल पुरानी वास्तुकला का कमाल है.
क्या है बरजील, जो घर को बनाता है प्राकृतिक AC?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बरजील, दरअसल पारंपरिक विंड टावर या हवा पकड़ने वाले मिनारें होती हैं, जो घरों की छतों पर बनाए जाते थे. ये ऊंचाई पर बहने वाली ठंडी हवा को पकड़कर घर के अंदर भेजते हैं. वहीं, गर्म हवा ऊपर उठकर बाहर निकल जाती है.
इस प्राकृतिक वेंटिलेशन सिस्टम की वजह से घर के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में कई डिग्री कम हो जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में बरजील घर के अंदर का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकता है. यही कारण है कि खाड़ी देशों में यह तकनीक सदियों तक इस्तेमाल होती रही और आज भी आधुनिक इमारतों में इसकी वापसी हो रही है.
मशराबिया क्या है और इससे कैसे गर्मी से मिलती है राहत?
पुराने दुबई के घरों में खिड़कियों पर जालीदार डिजाइन देखने को मिलती है, जिसे मशराबिया कहा जाता है. यह सिर्फ सजावट नहीं होती, बल्कि एक बेहद उपयोगी तकनीक है.
मशराबिया सूरज की सीधी रोशनी को अंदर आने से रोकती है, लेकिन हवा और प्राकृतिक रोशनी का रास्ता खुला रखती है. इससे घर के अंदर कम गर्मी पहुंचती है. 2024 में हुई एक स्टडी के मुताबिक, मशराबिया जैसी संरचनाएं कमरे का तापमान कम से कम 3 डिग्री सेल्सियस तक घटा सकती हैं.
दुबई के पुराने मुहल्लों में सिक्का क्या होता है?
अल फहीदी इलाके की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक है 'सिक्का'. यह 2 से 3 मीटर चौड़ी संकरी गलियां होती हैं, जो घरों के बीच बनाई जाती थीं.
इन संकरी गलियों की ऊंची दीवारें दिनभर छाया बनाए रखती हैं. साथ ही, ये गलियां हवा के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं और दुबई क्रीक की तरफ से आने वाली ठंडी हवा को मोहल्ले के अंदर तक पहुंचाती हैं. यही वजह है कि इन रास्तों पर चलते समय बाहर की तुलना में काफी राहत महसूस होती है.
आंगन और हल्के रंग भी हैं गर्मी से बचने के बड़े हथियार
पुराने दुबई के अधिकांश घरों में बीच में खुला आंगन होता था. रात के समय यह हिस्सा ठंडी हवा को जमा करता और फिर वही हवा आसपास के कमरों में फैलती थी. इसके अलावा घरों की दीवारें हल्के रंग की बनाई जाती थीं ताकि वे सूरज की गर्मी कम सोखें.
अब फिर लौट रही हैं पुरानी तकनीकें
आज जब दुनिया बढ़ती गर्मी और बिजली की खपत से जूझ रही है, तब दुबई की सदियों पुरानी ये तकनीकें फिर चर्चा में हैं. अबू धाबी की मसदर सिटी जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट्स में बरजील, संकरी गलियां और छायादार डिजाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है. दावा है कि ऐसे डिजाइन आसपास के इलाके की तुलना में तापमान को 10 डिग्री तक कम कर सकते हैं और ऊर्जा खपत में भी बड़ी कमी लाते हैं.
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यानी, दुबई के पुराने घर सिर्फ इतिहास नहीं हैं, बल्कि भविष्य की इमारतों के लिए भी एक सबक हैं. बरजील, मशराबिया और सिक्का जैसी तकनीकें बताती हैं कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर भी भीषण गर्मी से मुकाबला किया जा सकता है, वो भी बिना एसी पर पूरी तरह निर्भर हुए.
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