16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको के अल्मोगोर्डो में पहले परमाणु बम का सफल परीक्षण किया गया. इस तरह मैनहट्टन परियोजना के इस विस्फोटक परिणाम ने एटम बम के रूप में तबाही लाने महाविनाशक हथियार को जन्म दिया. यूरेनियम से बम बनाने की योजना की शुरुआत मित्र राष्ट्रों ने 1939 में ही शुरू कर दी थी. लेकिन, इसे अंजाम तक पहुंचाने में 6 साल लग गए. आखिरकार, इंसानों ने वो हथियार विकसित कर ही लिया, जिसमें मानव सभ्यता के विनाश के बीज छिपे हैं.
1939 में ही यूरेनियम से बम बनाने की योजना की नींव पड़ गई थी. जब भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने कोलंबिया विश्वविद्यालय में अमेरिकी नौसेना विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर सैन्य उद्देश्यों के लिए विखंडनीय पदार्थों के इस्तेमाल पर चर्चा की थी. उसी वर्ष, अल्बर्ट आइंस्टीन ने हंगरी में जन्मे भौतिक विज्ञानी लियो स्ज़िलार्ड के साथ मिलकर राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने इस सिद्धांत का समर्थन किया कि एक अनियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया में सामूहिक विनाश के हथियार के आधार के रूप में अपार क्षमता है.
फरवरी 1940 में अमेरिकी सरकार ने अनुसंधान के लिए कुल 6,000 डॉलर की राशि प्रदान की. लेकिन 1942 की शुरुआत में, जब अमेरिका धुरी शक्तियों के साथ युद्ध में शामिल हो गया और जर्मनी के खुद के यूरेनियम बम पर काम करने की आशंका बढ़ने लगी, तो युद्ध विभाग ने इस परियोजना में अधिक रुचि दिखाई और इसके लिए संसाधनों पर लगी सीमाएं हटा दी गईं.
ब्रिगेडियर-जनरल लेस्ली आर. ग्रोव्स, जो स्वयं एक इंजीनियर थे. अब एक ऐसे प्रोजेक्ट के इंचार्ज बन गए, जिसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ विद्वानों को एकत्रित करना और परमाणु शक्ति का उपयोग करके युद्ध को निर्णायक रूप से समाप्त करने के तरीके खोजना था. मैनहट्टन प्रोजेक्ट (अनुसंधान की शुरुआत के कारण इसे यह नाम दिया गया) सैद्धांतिक अन्वेषण के प्रारंभिक चरण में कई स्थानों से गुजरा. इनमें सबसे महत्वपूर्ण शिकागो विश्वविद्यालय था, जहां एनरिको फर्मी ने सफलतापूर्वक पहली विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू की.
लेकिन इस प्रोजेक्ट ने न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में अंतिम रूप लिया, जहां 1943 में जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने लॉस अलामोस की एक प्रयोगशाला में हैंस बेथे, एडवर्ड टेलर और फर्मी जैसे वैज्ञानिकों के साथ प्रोजेक्ट वाई का निर्देशन शुरू किया. यहां सिद्धांत और व्यवहार का संगम हुआ, क्योंकि परमाणु विस्फोट जैसी महत्वपूर्ण मात्रा प्राप्त करने और एक प्रभावी बम के निर्माण की समस्याओं का समाधान किया गया.
अंततः 16 जुलाई की सुबह, सांता फे से 120 मील दक्षिण में न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में, पहला परमाणु बम विस्फोट किया गया. वैज्ञानिक और कुछ गणमान्य व्यक्ति 10,000 गज दूर चले गए थे ताकि वे उस दृश्य को देख सकें जब चिलचिलाती रोशनी का पहला मशरूमनुमा बादल 40,000 फीट की ऊंचाई तक हवा में फैल गया और 15,000 से 20,000 टन टीएनटी के बराबर विनाशकारी शक्ति उत्पन्न हुई. विस्फोट के समय जिस मीनार पर बम रखा था, वह पूरी तरह से नष्ट हो गई.
अब सवाल यह था कि बम किस पर गिराया जाए? मूल लक्ष्य जर्मनी था, लेकिन जर्मन पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके थे. एकमात्र युद्धरत देश जापान ही बचा था.
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