क्या आपने कभी सोचा है कि कोई व्यक्ति बिना शराब पिए भी नशे में दिखाई दे सकता है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन दुनिया में एक ऐसी दुर्लभ बीमारी मौजूद है, जिसमें इंसान के शरीर के अंदर ही शराब बनने लगती है. इस बीमारी को ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम (Auto-Brewery Syndrome) कहा जाता है.
हाल ही में एक व्यक्ति का मामला चर्चा में आया, जिसकी जिंदगी इस बीमारी की वजह से पूरी तरह बदल गई. हैरानी की बात यह थी कि उसने वर्षों से शराब नहीं पी थी, लेकिन उसके शरीर में शराब की मात्रा पाई जाती थी और उसे बार-बार नशे जैसे लक्षण महसूस होते थे. ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम एक बेहद दुर्लभ बीमारी है. इसमें पेट और आंतों में मौजूद कुछ प्रकार के यीस्ट (फंगस) या माइक्रोऑर्गेनिज्म शरीर में पहुंचने वाले कार्बोहाइड्रेट और शुगर को अल्कोहल में बदल देते हैं.
क्या है ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम?
ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम एक बेहद दुर्लभ बीमारी है. इसमें पेट और आंतों में मौजूद कुछ प्रकार के यीस्ट (फंगस) या माइक्रोऑर्गेनिज्म शरीर में पहुंचने वाले कार्बोहाइड्रेट और शुगर को अल्कोहल में बदल देते हैं. यानी जब व्यक्ति रोटी, चावल, मिठाई, पास्ता या अन्य कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाता है, तो शरीर के अंदर ही एक तरह की फर्मेंटेशन प्रक्रिया शुरू हो जाती है और अल्कोहल बनने लगती है. यही वजह है कि बिना शराब पिए भी व्यक्ति को नशा महसूस हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यक्ति करीब 10 साल तक इस समस्या से जूझता रहा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है. कई बार उसे चक्कर आते, सिर भारी रहता और वह सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता था. शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद वह शराब पीता है, लेकिन जांच में पता चला कि उसके शरीर के अंदर ही अल्कोहल बन रही थी. इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी स्थिति का गहराई से स्टडी किया और बीमारी की पहचान की.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम के लक्षण शराब के नशे जैसे ही हो सकते हैं. जैसे- चक्कर आना, सिर दर्द होना, ध्यान लगाने में परेशानी, थकान महसूस होना, बोलने में लड़खड़ाहट, संतुलन बिगड़ना, मूड में बदलाव. कई बार मरीज को खुद भी समझ नहीं आता कि उसके साथ क्या हो रहा है.
जिंदगी पर पड़ा बड़ा असर
इस बीमारी ने व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को काफी प्रभावित किया. रिपोर्ट के मुताबिक, वह पहले की तरह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहा था. उसकी एनर्जी कम हो गई थी और कई काम करना मुश्किल हो गया था. सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि लोगों को उसकी बात पर विश्वास नहीं होता था, क्योंकि बिना शराब पिए शरीर में अल्कोहल बनने की बात सुनने में काफी अजीब लगती है.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी बहुत दुर्लभ है. इसका इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है. कई मामलों में डॉक्टर खानपान में बदलाव, कम कार्बोहाइड्रेट वाला आहार और कुछ विशेष दवाओं की मदद से समस्या को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं.
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