'पेपर लीक के कारण संकट में है शिक्षा व्यवस्था', देहरादून में छात्रों से बोले राहुल गांधी

राहुल गांधी ने शुक्रवार को देहरादून में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. राहुल ने आरोप लगाया कि सिर्फ 1 प्रतिशत लोग पैसे और पहुंच के दम पर पेपर लीक कराते हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और गरीब छात्रों का भविष्य इससे प्रभावित होता है.

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राहुल गांधी ने कहा कि NTA और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. (File Photo: PTI) राहुल गांधी ने कहा कि NTA और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. (File Photo: PTI)

अंकित शर्मा

  • देहरादून,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

राहुल गांधी ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं, रोजगार, सरकारी नौकरियों, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पेपर लीक के कारण संकट में है और अब तक 7.5 करोड़ छात्र इससे प्रभावित हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, उनकी समस्याओं और संघर्ष पर चर्चा का मंच है. उन्होंने कहा, 'भारत में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा हमारे बच्चों और युवाओं का भविष्य है.'

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राहुल ने आरोप लगाया कि सिर्फ 1 प्रतिशत लोग पैसे और पहुंच के दम पर पेपर लीक कराते हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और गरीब छात्रों का भविष्य इससे प्रभावित होता है. उन्होंने दावा किया कि आज देश में पेपर लीक इस स्तर तक पहुंच गया है कि अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मेन्यू कार्ड तक उपलब्ध हैं.

उन्होंने कहा कि अगर आपके पास करोड़ों रुपये हैं तो आप मेन्यू कार्ड से अपनी पसंद का पेपर चुन सकते हैं. यही आज भारत की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति है.

'अब तक किसी को सजा नहीं मिली'

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी दोषी को सख्त सजा नहीं मिली. उन्होंने दावा किया कि 152 पेपर लीक की घटनाओं से 7.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए, लेकिन किसी को दोषी ठहराकर दंडित नहीं किया गया.

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उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. उनके अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और उन पर किसी राजनीतिक संगठन का नियंत्रण नहीं होना चाहिए.

'सरकारी नौकरी का रास्ता ही बचा है'

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में युवाओं के लिए रोजगार के चार प्रमुख रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं. उनके मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र कमजोर होने, उद्यमिता के लिए बैंक लोन मिलने में कठिनाई, आईटी क्षेत्र पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव और सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण बढ़ने के कारण सरकारी नौकरी ही युवाओं के लिए सबसे बड़ा विकल्प बचा है.

उन्होंने दावा किया कि करीब 9 करोड़ युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं, लेकिन उनमें से केवल करीब 6 लाख को ही नौकरी मिल पाती है.

NEET अभ्यर्थी रिया थापा के पिता ने सुनाया दर्द

कार्यक्रम के दौरान हाल ही में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाली NEET अभ्यर्थी रिया थापा के पिता भी मंच पर पहुंचे. उन्होंने भावुक होकर राहुल गांधी से कहा, 'हमें न्याय दिलाइए. सरकार ने हमारे परिवार से हालचाल तक नहीं पूछा. मेरी बेटी सिस्टम और NTA से बेहद नाराज थी. उसके साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए.'

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राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है और उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए.

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