अमित शाह मंदिर से बाहर निकले तो तेलंगाना BJP अध्यक्ष ने हाथ से उठाकर दिए जूते, TRS ने कसा तंज

गृह मंत्री अमित शाह के जूते लाते हुए तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. वीडियो सामने आने के बाद TRS ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है.

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अमित शाह के जूते लाते हुए तेलंगना बीजेपी अध्यक्ष का वीडियो वायरल अमित शाह के जूते लाते हुए तेलंगना बीजेपी अध्यक्ष का वीडियो वायरल

aajtak.in

  • हैदराबाद,
  • 22 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 12:05 AM IST

सोशल मीडिया पर तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय कुमार (Bandi Sanjay Kumar) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. उस वीडियो में संजय, गृह मंत्री अमित शाह के जूते लाते दिख रहे हैं. उस वीडियो के सामने आते ही TRS बीजेपी और बंदी संजय कुमार की खिंचाई कर रही है. पार्टी इस वीडियो को दक्षिण भारत के सम्मान के साथ जोड़ रही है. 

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जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह सिकंदराबाद के उज्जैनी महाकाली मंदिर में दर्शन करने गए थे. जब वे मंदिर से दर्शन कर वापस आ रहे थे, तभी तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय कुमार उनके जूते लेकर आ गए. उस वीडियो के वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया है. TRS के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रमा राव ने कहा है कि जनता ये सब देख रही है. 

Telangana BJP state president MP Bandi Sanjay rushing to give foot-ware to his colleague MP Amit Shah!

Gulamgiri at its best 👇

— YSR (@ysathishreddy)

इस सब के अलावा तेलंगाना कांग्रेस नेता Manickam Tagore ने भी वायरल वीडियो को बीजेपी की पिछड़े समाज के प्रति संवेदनशीलता से जोड़ दिया है. ट्वीट कर उन्होंने लिखा है कि तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के जूते ला रहे हैं, कहां गई तेलुगू समाज का आत्म सम्मान. ये वीडियो दिखाती है कि बीजेपी में पिछड़े वर्ग के नेताओं के लिए कितना सम्मान है, उनका क्या पद है. वैसे इस पूरे विवाद पर तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि मंदिर में भी सेवा भाव से जूते-चप्पल धोए जाते हैं, क्या उसे भी गुलामी कहा जा सकता है?

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बंदी संजय कुमार ने ये बात स्पष्ट कर दी कि वे अमित शाह को अपना पिता समान मानते हैं, ऐसे में उन्होंने जो भी मदद की वो सिर्फ सम्मान में की थी. बीजेपी तेलंगाना अध्यक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाते हुए पूछ लिया कि कई मौकों पर अधिकारी या फिर पार्टी के नेता उनके या फिर उनके परिवार के पैर छूते हैं, क्या इसे भी गुलामी मान लिया जाए?

(PTI का इनपुट्स)

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