खाप पंचायत बालिग लड़के-लड़की को शादी से नहीं रोक सकतीः सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर सरकार इस पर बैन नहीं लगाती है तो अदालत इस दिशा में कदम उठाएगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिया आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिया आदेश

अनुषा सोनी / जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शादी करने वाले बालिग पुरूष और महिला के खिलाफ खाप पंचायतों या संघों के हर कदम को 'पूरी तरह से अवैध' करार दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई वयस्क पुरूष और महिला विवाह करते हैं, तो कोई खाप पंचायत या समाज उन पर सवाल नहीं उठा सकता है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ ने अंतर-जातीय और सगोत्र विवाह के मामलों में परिवार की इज्जत की खातिर ऐसे युवा दंपतियों की हत्या और उन्हें परेशान करने से रोकने के उपायों के बारे में केन्द्र से कहा कि वह न्याय मित्र राजू रामचन्द्रम द्वारा पहले दिये गये सुझावों पर अपना जवाब दे.

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पीठ ने कहा, 'न्याय मित्र खाप के बारे में जो कुछ भी कह रहे हैं, उससे हमें कोई मतलब नहीं है. हमारा सरोकार तो यह है कि यदि वयस्क लड़का या लड़की विवाह करते हैं तो कोई खाप, व्यक्ति या कोई समाज उन पर सवाल नहीं उठा सकता है.'

पीठ ने केन्द्र से कहा कि वह न्याय मित्र के सुझावों पर कोई सुझाव नहीं देगी बल्कि वह उनके सुझावों के आधार पर आदेश देने के बारे में सोच रही है.

शीर्ष अदालत ने इससे पहले गैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी, न्याय मित्र और खाप पंचायतों से इस मामले में सुझाव मांगे थे. इस संगठन ने ही 2010 में याचिका दायर करके परिवार की इज्जत की खातिर होने वाले ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.

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इस मामले में न्यायालय ने खाप पंचायतों से भी जवाब मांगा था ताकि परिवार की इज्जत की खातिर ऐसे दंपति की हत्या और महिला को परेशान करने से रोकने के बारे में कोई आदेश देने से पहले उनके विचार जाने जा सकें.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी की. पीठ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर सरकार इस पर बैन नहीं लगाती है तो अदालत इस दिशा में कदम उठाएगी.

बता दें में सकिय है. इसके अलावा अंतर जातीय प्रेम विवाह करने वाले युवक युवतियों के साथ अत्याचार, उत्पीड़न और मर्डर तक की घटनाएं सामने आती रही हैं. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई थी, जिस पर आज सुनवाई हुई और कोर्ट ने खाप पंचायतों के खिलाफ सख्त आदेश सुनाया.

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