समलेटी बमकांड: 23 साल बाद बरी हुए 3 बेगुनाह, रिहाई के बाद बोले- बस अतीत पीछा छोड़ दे

22 मई 1996 को बीकानेर से आगरा जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में बम धमाका हुआ था. इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 37 लोग घायल हो गए थे.

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रईस बेग- फोटो में दाएं से दूसरे (फोटो- आजतक) रईस बेग- फोटो में दाएं से दूसरे (फोटो- आजतक)

टीके श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST

22 मई 1996 को बीकानेर से आगरा जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में बम धमाका हुआ था. इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 37 लोग घायल हो गए थे. इसके बाद मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से अब तक 7 लोग बरी हो चुके हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट ने 1996 के समलेटी बमकांड मामले में आरोपित लतीफ अहमद बाजा, अली भट्ट, मिर्जा निसार, अब्दुल गोनी और रईस बेग को बरी कर दिया. ये लोग 23 साल जेल में गुजराने के बाद बेगुनाह साबित हुए हैं. 23 जुलाई को रिहाई के बाद से अब ये अपनी बिखरी हुई जिंदगी सहेजना चाहते हैं. इन्हें ना तो किसी से शिकायत है और ना ही किसी तरह के मुआवजे की चाहत, ये बस आगे की बची जिंदगी में अतीत के साये को नहीं देखना चाहते हैं.

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गिरफ्तारी के वक्त गोद में थी बेटी

आगरा के गढ़इया एरिया के रहने वाले रईस बेग का परिवार सहमा हुआ है. उनका कहना है कि अतीत में जो हुआ उसे लेकर आगे किसी तरह दिक्कत ना आए, बस यही दुआ कर रहे हैं. हमें किसी से कोई शिकवा-शिकायत नहीं है.

पेशे से दर्जी रहे रईस बेग की जब गिरफ्तारी हुई थी तो उनकी बेटी गोद में थी और एक बेटा पहली क्लास में और दूसरा बेटा दूसरी क्लास में पढ़ता था. परिजनों ने बताया कि रईस बेग को जब पुलिस लेकर जा रही थी तो उस वक्त उनकी पत्नी से एक महिला कॉन्स्टेबल ने कहा था कि ये जिस मामले में पकड़ा गया है, अब इसका घर आना मुश्किल है, लेकिन रईस बेग की पत्नी को यकीन था कि उनके पति एक दिन घर आएंगे. वहीं, एक पड़ोसी ने बताया कि जब रईस बेग को पुलिस इतने संगीन आरोपों में पकड़कर ले गई थी तो मोहल्ले वालों ने उनके घर की तरफ से आना-जाना बंद कर दिया था, लेकिन अब रईस बेग घर के चबूतरे पर बैठकर लोगों के साथ मिलजुल रहे हैं.

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3 महीने बाद गिरफ्तारी का पता चला...

कश्मीर के डोडा जिले के बदरा के रहने वाले अब्दुल गोनी (65) की रिहाई के बाद aajtak.in ने उनकी बहन सुरैया से बातचीत की. सुरैया ने कहा कि अब कुछ बचा नहीं है, जो बचा है वे अमन-चैन से कट जाए बस. 14 साल दिल्ली और 9 साल जयपुर के चक्कर काट कर थक चुकी थी. खैर ऊपर वाले ने सुन ली. सुरैया ने बताया इस मामले में 1997 में अब्दुल गोनी को गुजरात के अहमदाबाद से पुलिस ने पकड़ा था. इसकी जानकारी हमें तीन महीने बाद हुई थी, जब घर पर सीआईडी वालों ने आकर बताया. इसके बाद 18 महीने उसे जयपुर जेल में रखा गया. फिर वहां से दिल्ली लाया गया. दिल्ली में 14 साल केस चला और वह वहां से बरी हो गया. इस दौरान हम पर बहुत कुछ बीता, लेकिन चीजें बस चल रही थीं.

जब अब्दुल को कहा गया पाकिस्तानी...

उन्होंने बताया कि यहां से बरी होने के बाद मामला गुजरात पहुंच गया. वहां अब्दुल को पाकिस्तानी बताया गया, लेकिन सेशन कोर्ट ने उसकी बीएसई की मार्कशीट, सर्टिफिकेट और जो वो स्कूल चलाता था उसके अन्य दस्तावेजों को देखते हुए बरी कर दिया था. इसके बाद ये मामला जयपुर चला गया जहां मैंने 9 साल चक्कर काटे. सुरैया ने बताया कि पैरोल के लिए कई बार कोशिश की थी, लेकिन 23 साल में एक बार भी पैरोल या जमानत नहीं मिली. इस बीच मां भी गुजर गई. घर में एक भाई विकलांग है और दूसरे की एक ही किडनी है. सुरैया गर्वमेंट हॉस्पिटल से बतौर सुपरवाइजर रिटायर हुई हैं और घर की जिम्मेदारी उन्हीं पर है.

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रिहाई के बाद करना चाहते हैं शादी...

श्रीनगर के रहने वाले मिर्जा निसार की उम्र 39 साल है. रिहाई के बाद अब शादी करना चाहते हैं और नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं. निसार के भाई मिर्जा इफ्तेखार को लाजपत नगर ब्लास्ट में आरोपित किया गया था, लेकिन 2014 में उन्हें बरी कर दिया गया. इफ्तेखार ने फोन पर बताया कि लतीफ अहमद बाजा और अली भट्ट भी श्रीनगर के रहने वाले हैं. अली भट्ट के पिता की हाल ही मौत हुई थी. निसार, अली भट्ट और अहमद बाजा की गिरफ्तारी नेपाल के काठमांडू से हुई थी. जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इन्हें बरी कराने में अहम भूमिका निभाई है.

क्या था मामला

बता दें कि 22 मई 1996 को बीकानेर से आगरा जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में बम धमाका हुआ था. इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 37 लोग घायल हो गए थे. इसके बाद मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से अब तक सात लोग बरी हो चुके हैं. एक आरोपी को साल 2014 में ही बरी कर दिया गया था. राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी डॉ अब्दुल हमीद को फांसी की सजा और पप्पू सलीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

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