Modi@4: नक्सलवाद के खात्मे में किस हद तक सफल रही मोदी सरकार

मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं. अब सरकार अगले आम चुनाव की तरफ बढ़ रही है. ऐसे में सरकार के वादों को याद करना भी लाजमी हो जाता है. इन वादों में एक अहम वादा था, नक्सली समस्या का समाधान. लेकिन इस मुद्दे पर मोदी सरकार कहीं न कहीं अपने वादे से दूर नजर आती है.

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नक्सलियों ने पिछले चार वर्षों में जमकर उत्पात मचाया है नक्सलियों ने पिछले चार वर्षों में जमकर उत्पात मचाया है

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2018,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं. अब सरकार अगले आम चुनाव की तरफ बढ़ रही है. ऐसे में सरकार के वादों को याद करना भी लाजमी हो जाता है. इन वादों में एक अहम वादा था, नक्सली समस्या का समाधान. लेकिन इस मुद्दे पर मोदी सरकार कहीं न कहीं अपने वादे से दूर नजर आती है. पिछले चार सालों में नक्सल प्रभावित इलाकों में अगर सुरक्षा बलों ने लगातार कार्रवाई की तो नक्सली भी पीछे नहीं रहे. उन्होंने भी सुरक्षा बलों और पुलिस के जवानों को अपना निशाना बनाया.

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मई 2014 के बाद जब सरकार बदली तो निजाम भी बदला. नक्सलवाद को लेकर सरकार ने जो वादे चुनाव के दौरान किए थे. उनको पूरा किए जाने की बात तो दूर, इस दिशा में कोई पुख्ता कदम तक उठाए जाने की कवायद नहीं दिखाई दी. हालांकि सरकार की तरफ से गृहमंत्री लगातार नक्सलियों के खात्मे की बात करते रहे. आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल मिलाकर 126 जिलों को गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित बताया था.

उन सभी जिलों में नक्सल समस्या से निपटने के लिए केंद्र ने बजट में विशेष प्रावधान किया. सरकार के दावों की मानें तो प्रभावित जनपदों में से 44 जिले नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो गए. इनमें 32 जनपद तो ऐसे हैं, जहां पिछले कुछ सालों में नक्सली हमले नहीं हुए. मगर 30 जिले अभी भी ऐसे हैं, जहां नक्सलियों के हौंसले काफी बुलंद हैं और वे अपने मिशन को जारी रखे हुए हैं.

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गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2013 के मुकाबले वर्ष 2017 में नक्सली हमलों में 35 फीसदी की कमी आई है. लेकिन कुछ हमले ऐसे भी हुए जिन्होंने पूरी सरकार को हिला कर रख दिया. सुरक्षाबलों के कई जवान शहीद हो गए. नक्सल की समस्या से जूझने वाले राज्यों में ओडिशा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार तो हैं ही, लेकिन नक्सलियों के गढ़ के रूप में छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है. जहां पिछले 4 वर्षों में नक्सलियों ने बड़ी वारदात अंजाम दी हैं.

24 अप्रैल 2014, सुकमा, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने बड़े हमले को अंजाम दिया. इस हमले में CRPF के 25 जवान शहीद हुए और 6 जवान जख्मी हुए. सुकमा के बुकार्पाल से डेढ़ किलोमीटर के अंदर नक्सलियों ने घात लगाकर ये हमला किया. इस घटना को करीब 150 नक्सलियों ने अंजाम दिया था. गौरतलब है कि 6 अप्रैल, 2010 में नक्सलियों ने इसी जगह एक बड़े हमले को अंजाम दिया था, जिसमें CRPF के 76 जवान शहीद हो गए थे. शहीदों में एक डिप्टी कमांडेंट और असिसटेंट कमांडेंट भी शामिल थे. उस हमले को करीब एक हजार नक्सलियों ने अंजाम दिया था.

2015 में भी शांत नहीं थे नक्सली

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया था. जिसमें पुलिस के एक प्लाटून कमांडर समेत सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और 10 अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे. सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिड़ेमल गांव के जंगल में नक्सलियों ने पुलिस पर घात लगाकर हमला किया था. इसी तरह से साल 2015 में कई जगहों पर पुलिस, सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुईं.

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2016 में 3103 नक्सली घटनाएं

छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 106 जिलों में जनवरी 2012 और इस साल 24 अप्रैल के बीच 10400 नक्सली वारदातों के दौरान नक्सलियों द्वारा कुल 83 हथियार और 6683 जिंदा कारतूस लूटे गए. साल 2016 में नक्सली हिंसा की 3103 घटनाएं घटीं.

2017 में 700 से ज्यादा नक्सली हमले

साल 2017 में देश के अलग अलग राज्यों में 700 से अधिक नक्सली हमले हुए. जिनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से 35 हथियार लूटे गए. 21 हथियारों को नक्सलियों ने 24 अप्रैल को लूटा, जब उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुकमा में भीषण हमले को अंजाम दिया था. वो हमला साल 2010 के बाद अब तक का सबसे भीषण नक्सली हमला था, जिसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए. उस दिन जवानों से 21 हथियार, पांच वायरलेस सेट, दो दूरबीन, 22 बुलेटप्रूफ जैकेट और एक माइन डिटेक्टर लूटे गए. 3000 जिंदा कारतूस, 70 मैग्जीन और 67 अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर भी लूट लिए गए.

13 मार्च 2018, सुकमा, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में फिर बड़ा नक्सली हमला हुआ. इस हमले में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हुए. ये हमला सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में हुआ था. जिसके लिए लैंडमाइन का इस्तेमाल किया गया था. इस दौरान नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी. जिसमें 25 जवान घायल हो गए थे. नक्सलियों ने IED प्रूफ व्हीकल को ब्लास्ट कर उड़ाया था. दरअसल, तेलंगाना बॉर्डर पर नक्सलियों के कुछ बड़े कमांडर मारे गए थे. जिसके बाद नक्सलियों ने ये हमला किया था. इसके बाद कोबरा कमांडोज ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया. लेकिन दोपहर को करीब 100 से 150 नक्सलियों ने सीआरपीएफ के वाहन पर फिर हमला कर दिया था.

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20 मई 2018, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने खूनी खेल खेला. चोलनार के जंगलों में नक्सलियों के IED ब्लास्ट से एक गाड़ी उड़ा दी. जिसमें सवार सात जवान शहीद हो गए. इनमें से एक जवान ने अस्पताल में दम तोड़ा. सभी जवान जिला पुलिस बल के थे. वे जवान निजी गाड़ी में सवार थे. उनके मूवमेंट की सूचना नक्सलियों को काफी पहले से मिल चुकी थी. जैसे ही यह गाड़ी उनके टारगेट में आई, नक्सलियों ने IED विस्फोट कर दिया. नक्सलियों ने जवानों के पास से उनके मोबाइल, वायरलेस सेट समेत पांच इंसास रायफल और दो एके 47 भी लूट ली थी.

कुल मिलाकर पिछले चार सालों में अगर मोदी सरकार नक्सलियों के खिलाफ उठाए कदमों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, तो उपरोक्त घटनाओं से पता चलता है कि सरकार कई मोर्चों पर विफल भी रही. ऐसे में यहां जा सकता है कि नक्सलवाद की समस्यों को लेकर सरकार के दावे कमजोर नजर आते हैं.

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