जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के तहत मिले स्पेशल स्टेटस का दर्जा खत्म किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इस संबंध में पहली बार बोलते हुए राज्य के लोगों को आश्वस्त किया कि उनके हितों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि भविष्य में जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो और पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि को चुनने का अवसर मिले.
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि जम्मू-कश्मीर में दशकों से, हजारों की संख्या में ऐसे भाई-बहन रहते हैं, जिन्हें लोकसभा के चुनाव में तो वोट डालने का अधिकार तो था, लेकिन वो विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे. उन्होंने कहा कि ये वो लोग हैं जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे. तो क्या इन लोगों के साथ अन्याय ऐसे ही चलता रहता?
राज्य में चुनाव के भविष्य के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हम सभी चाहते हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हों. नई सरकार बने और मुख्यमंत्री भी बनें. मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि आपको बहुत ईमानदारी के साथ, पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसे पंचायत के चुनाव पारदर्शिता के साथ संपन्न कराए गए, वैसे ही विधानसभा के भी चुनाव होंगे. मैं राज्य के गवर्नर से ये भी आग्रह करूंगा कि ब्लॉक डवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) का गठन, जो पिछले दो-तीन दशकों से लंबित है, उसे पूरा करने का काम भी जल्द से जल्द शुरू किया जाए.'
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को मिल रहे स्पेशल स्टेटस का दर्जा खत्म किए जाने पर कहा कि जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो अब जाकर पूरा हुआ.
सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक राष्ट्र के तौर पर, एक परिवार के तौर पर, आपने, हमने, पूरे देश ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. एक ऐसी व्यवस्था, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे, जो उनके विकास में बड़ी बाधा थी, वो अब दूर हो गई है.
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