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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के लिए चालू वित्त वर्ष के जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है.

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सेंसेक्स 220 अंक लुढ़का सेंसेक्स 220 अंक लुढ़का

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के लिए चालू वित्त वर्ष के जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है. आईएमएफ की इतनी बड़ी कटौती की वजह से लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली है.

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 220 अंक तक लुढ़क गया और यह 41 हजार 400 अंक के नीचे आ गया. वहीं निफ्टी की बात करें तो 30 अंक से अधिक की गिरावट रही और यह 12 हजार 200 अंक के नीचे कारोबार करता दिखा.

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श्रीलंका के युवा तेज गेंदबाज माथिसा पाथिराना उस समय चर्चा में आ गए जब उन्होंने साउथ अफ्रीका में जारी अंडर-19 विश्व कप में भारत के खिलाफ 175 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी. यह गेंद उन्होंने भारत के यशस्वी जायसवाल को फेंकी जो वाइड थी. बाद में यह पता चला कि गेंद की स्पीड दर्ज करने वाली मशीन (Speed-gun) में कुछ गड़बड़ी थी, जिसके कारण मशीन ने शुरुआत में गेंद की तेजी 175 किलोमीटर प्रति घंटे बताई.

नोटबंदी के दौरान हजारों ज्वैलर्स का एक बड़ा कारनामा वित्त मंत्रालय की पकड़ में आया है. जो ज्वैलर्स पहले बैंकों में साल में 2-3 लाख रुपये जमा करते थे, उन्होंने नोटबंदी के दौरान कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपये जमा किए. उन्होंने ग्राहकों का जो ब्योरा और बिल दिखाए वे फर्जी थे और वे इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए कि आख‍िर इतनी नकदी उनके पास कहां से आई.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त के अनुमान को काफी घटा दिया है. वित्त वर्ष 2019-20  में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़त दर महज 4.8 फीसदी रहेगी. आईएमएफ ने कहा कि भारत और इसके जैसे अन्य उभरते देशों में सुस्ती की वजह दुनिया के ग्रोथ अनुमान को उसे घटाना पड़ा है. आईएमएफ ने दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान इस अनुमान को जारी किया.

सभी सरकारी विभाग आर्थिक मंदी का असर महसूस कर रहे हैं, क्योंकि सरकार ने अपने बजटीय अनुमानों के वार्षिक बजट व्यय में 2.2 लाख करोड़ रुपये की कटौती करने जा रही है. सरकार 2020 के बजट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में 3.48 लाख करोड़ रुपये की कमी का सामना करने की संभावना है. वहीं प्रोविजनल डाटा और अनुमान कहते हैं कि आर्थिक विकास के लड़खड़ाने और निराशाजनक कर संग्रह के चलते सरकार पर 1.45 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व दबाव पड़ सकता है.

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