टैक्सियों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़ा कानून बनाने की तैयारी: मेनका गांधी

टैक्सियों में आए दिन महि‍लाओं के साथ हो रही वारदात को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कड़ा कानून बनाने की तैयारी में है. इसी को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने आज तक से खास बातचीत की.

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी

अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 3:45 PM IST

टैक्सियों में आए दिन महि‍लाओं के साथ हो रही वारदात को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कड़ा कानून बनाने की तैयारी में है. इसी को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने आज तक से खास बातचीत की.

टैक्स‍ियों में आए दिन घटनाएं होती रहती हैं. महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. क्या उनको लेकर आप नया कानून बनाने की तैयारी कर रही हैं?
मेनका: कानून मतलब पार्लियामेंट जाने की जरूरत नहीं है लेकिन इसको लेकर हम सोच रहे हैं. इसके बारे में कुछ कुछ चीजें बहुत जरूरी हैं. हालांकि यह मामला मेरे महकमे का नहीं है लेकिन हम यह मामला बहुत सख्ती से देख रहे हैं. दो-तीन चीजें हैं. मिसाल के तौर पर पहले तो सेल्फ लुकिंग डिवाइस को डिसेबल करना चाहिए. सामने और पीछे बीच में एक कांच होना चाहिए, जो पीछे की तरफ से खुले. तीसरी चीज जो हम सोच रहे हैं वह है कि बहुत सारे लोग अपनी टैक्सी को किराए पर देते हैं. अब उनकी तस्वीर गाड़ी पर आगे चिपकी होनी चाहिए. टैक्सी में बैठते ही सवारी कन्फर्म कर ले कि जो तस्वीर है, वो टैक्सी ड्राइवर की है या नहीं.

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आपने कहा कि यह मामला आपके मंत्रालय के अधीन नहीं आता है तो क्या दूसरे मंत्रालयों से एक कोऑर्डिनेट कर रहे हैं कानून बनाने के लिए?
मेनका: दूसरे मंत्रालय से कोऑर्डिनेट करके आज हम एक लिस्ट बना रहे हैं कि क्या चाहिए. फिर उनको बुला कर, बैठ कर देखेंगे कि इसमें क्या बना सकते हैं क्योंकि अब टैक्सी में बैठने से महिलाएं घबरा रही हैं.

अगर कानून का पालन नहीं किया जाता है उनके लिए क्या सजा होगी? क्या प्रावधान है उनके लिए?
मेनका: क्रिमिनल सजा तो है ही उनके लिए. उसके ऊपर से उनका लाइसेंस कैंसिल हो. यह सब सोचेंगे.

इस तरह की गड़बड़ी और घटनाओं के लिए पहले से कानून हैं. इसमें नया क्या है. क्या इसके लिए नई प्रावधान होंगे, नए तरीके से इंप्लीमेंटेशन होगा?
मेनका: हम यह सोच रहे हैं कि क्या तरीका है. क्योंकि एक हफ्ते से इसको लेकर मैं बहुत चिंतित हूं कि क्या किया जाए. औरतें टैक्सी में बैठने से डरे न. खास अभी गुड़गांव में घटना हुई थी. दो लोग पहले से टैक्सी में बैठे थे. जब पहले से टैक्सी में दो लोग हैं तो क्या आपको बैठना चाहिए. इस तरह की बातें हमें सोचनी चाहिए. आज और कल के बीच में हम इसका खाका तैयार कर लेंगे. हम मीटिंग करवा कर यह सारे पॉइंट्स ढूंढ रहे हैं क्या कर सकते हैं. आप भी हमें बताएं कि किस तरह आपकी टैक्सी का सफर बेखौफ हो जाएं.

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कितना व्यवहारिक होगा? आप इसे कितना लागू कर पाएंगे?
मेनका: एक बार बन जाए. लागू तो इसे किया ही जाएगा.

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