नोटबंदी: शादियों के सीजन में जूलर्स को उम्मीद थी बंपर बिजनेस की, हो गया बंटाधार

जेवरात की खरीद फरोख्त के लिए मुंबई के झवेरी बाजार का नाम देशभर में मशहूर है. शादियों के सीजन में यहां की रौनक देखते ही बनती थी लेकिन नोटबंदी के बाद से यहां का माहौल बदल गया है. इन दिनों यहां मुश्किल से ही कोई ग्राहक नजर आता है.

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सोने पर नोटबंदी की मार सोने पर नोटबंदी की मार

सबा नाज़ / खुशदीप सहगल / विद्या

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 4:40 AM IST

जेवरात की खरीद फरोख्त के लिए मुंबई के झवेरी बाजार का नाम देशभर में मशहूर है. शादियों के सीजन में यहां की रौनक देखते ही बनती थी लेकिन नोटबंदी के बाद से यहां का माहौल बदल गया है. इन दिनों यहां मुश्किल से ही कोई ग्राहक नजर आता है.

श्री मुंबई गोल्ड जूलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन स्थिति को इन शब्दों में बयान करते हैं- "इस सीजन में 29,000 शादियां तय थीं. इसी को देखते हुए बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया गया था. लेकिन के बाद किसी के पास इतना कैश नहीं है कि वो सोना खरीदने पर खर्च कर सके. जिनके घरों में शादियां हैं वो अपना पुराना सोना लाकर नए में बदल रहे हैं. लेकिन नई खरीदारी कोई नहीं कर रहा.'

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जैन के मुताबिक स्थिति ऐसी है कि कोई अपना सोना बेचने भी आ रहा है तो उसे बदले में देने के लिए जूलर्स के पास कैश नहीं है. जैन ने बताया कि कुछ दिन पहले एक ग्राहक उनके पास बेचने के लिए आया. उसे हॉस्पिटल के मोटे बिलों का भुगतान करने के लिए पैसे की जरूरत थी. लेकिन उसकी मदद नहीं हो पाई क्योंकि बदले में देने के लिए कैश ही नहीं था.

श्रीमुंबा देवी दागीना बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्र जैन ने भी नोटबंदी के बाजार पर असर को लेकर ऐसी ही राय व्यक्त की. इंद्र जैन ने कहा- 'बाजार बहुत गिर गया है. लोग ऐसे वक्त में जो भी कैश उपलब्ध हो पा रहा है उसे खाने जैसी बुनियादी जरूरतों पर ही खर्च कर रहे हैं. ये जरूरतें पूरी होने पर ही सोने जैसी लग्जरी के बारे में कोई सोच सकता है.'

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अधिकतर जूलर्स का कहना है कि 8 नवंबर के बाद उनका अधिकतर ट्रांजेक्शन कार्ड पेमेंट से ही हुआ है. कार्ड पेमेंट पर सर्विस चार्ज होता है जो 1.40 रुपए से 2 रूपए या ज्यादा होता है जो कि कार्ड की लिमिट पर निर्भर करता है.

जैन कहते हैं- 'शादियों के सीजन में जब कोई सोना खरीदता है तो न्यूनतम खरीदारी 3 लाख रुपए की होती है. इतनी रकम अगर कार्ड से दी जाती है तो उस पर हजारों में बैठता है. कार्ड के साथ ये भी देखा जाता है कि आधा ही भुगतान होता है क्योंकि हर कार्ड की लिमिट होती है. इसलिए ज्यादातर लोग कैश ट्रांजेक्शन ही पसंद करते हैं.'

ऑल इंडिया जेम्स एंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन के देश भर में 10,000 सदस्य हैं. फेडरेशन के सदस्य रमन सोलंकी सोने की चेन के थोक कारोबारी हैं. सोलंकी कहते हैं- 'इस साल दीवाली पर जूलर्स ने अच्छा कारोबार किया था. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि नवंबर-दिसंबर में शादियों के सीजन में भी बंपर कारोबार होगा. लेकिन नोटबंदी से पूरा कारोबार 10 से 20 फीसदी ही रह गया है.'

अधिकतर जूलर्स का यही कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष के खत्म होने से पहले सोने के बाजार में कोई बदलाव आने की उम्मीद नहीं है. झवेरी बाजार में एक जूलरी स्टोर के मालिक रिशंत जैन कहते हैं- 'लोगों के पास इतना कैश आने में वक्त लगेगा कि वो सोना खरीदने लायक खर्च करने में समर्थ हो सकें. शादियों के सीजन में सोने की जो भी खरीदारी होती थी वो अमूमन कैश में ही होती थी.'

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