चीन की चालाकी समझने के लिए मंदारीन सीखेंगे ITBP के जवान, मसूरी में होगी ट्रेनिंग

सिक्किम के नजदीक डोकलाम में चल रही चीनी सेना और भारतीय सेना की तनातनी के बीच भारत और चीन सीमा की रखवाली करने वाले ITBP के जवानों को मंदारीन यानी चीनी भाषा सिखाई जाएगी. ITBP इसके लिए मसूरी के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एक डिपार्टमेंट खोल रहा है, जिसमें चीनी भाषा जानने वाले ITBP के अधिकारियों और जवानों की तैनाती शुरू की जा चुकी है.

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चीनी सैनिकों की भाषा समझने के लिए अभियान चीनी सैनिकों की भाषा समझने के लिए अभियान

रोहित कुमार सिंह / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 16 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

चीन से सीमा विवाद के बीच बॉर्डर पर तैनात होने वाले ITBP के जवानों को बड़े स्तर पर चीनी भाषा सीखने का अभियान शुरू किया जाएगा. अब आपको ITBP के जवान  'नी हाओ' यानी नमस्कार और 'हुई कु' यानी पीछे हट जाओ जैसी चीनी भाषा को बोलते नज़र आएंगे. इस अभियान इसलिए चलाया जा रहा है ताकि बॉर्डर वह चीनी सैनियों की भाषा को भी समझ सकें.

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सूत्र बताते हैं कि, पिछले 55 दिनों से सिक्किम के नजदीक डोकलाम में चल रही चीनी सेना और भारतीय सेना की तनातनी के बीच भारत और चीन सीमा की रखवाली करने वाले ITBP के जवानों को मंदारीन यानी चीनी भाषा सिखाई जाएगी. ITBP इसके लिए मसूरी के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एक डिपार्टमेंट खोल रहा है, जिसमें चीनी भाषा जानने वाले ITBP के अधिकारियों और जवानों की तैनाती शुरू की जा चुकी है.

पहले फेज में 12 लोगों की तैनाती की जाएगी जो चीनी भाषा हैं. जानकारी के मुताबिक़ वर्तमान समय में 200 से 250 अधिकारी और जवान जेएनयू से चीनी भाषा सीख चुके हैं. इन सीखे हुए अधिकारी और जवानों को ITBP ने सीमा पर अलग-अलग जगहों पर तैनात किया हुआ है. अभी चीन-भारते के बीच सीमा पर होने वाली बातचीत को समझने में यही जवान मदद करते हैं. लेकिन पर आने वाले समय में और सभी बीओपी में चीनी भाषा जानने वाले जवान और अधिकारी तैनात किए जाएंगे.

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आपको बात दें कि जब भी चीनी सेना की तरफ से घुसपैठ की जाती है तो चीनी सैनिकों को ITBP लाल रंग के पोस्टर दिखाती है जिसमें लिखा रहता है 'Go Back' इसी तरीके के पोस्टरों का इस्तेमाल कई बार होता है. 'आजतक' की टीम ने जब बाराहोती के नज़दीक मौजूद रिमखिम पोस्ट का दौरा किया था तो उस समय भी भारत की तरफ से ITBP के जवान लाल रंग का पोस्टर दिखाया और बताया कि किस तरह वह लोग चीनी सैनिकों को वापस भेजने के लिए ऐसे पोस्टरों का इस्तेमाल करते हैं.

चीनी भाषा सीखने के पीछे का उद्देश्य!

सूत्र बताते हैं कि चीनी भाषा मंदारीन को सीखने के पीछे घुसपैठ के दौरान उनकी भाषा को सही ढंग से समझना है. एक उद्देश्य यह भी है कि चीन के सैनिक घुसपैठ के दौरान कई तरीके से बात करते हैं जिसको हमारे सैनिक नहीं समझ पाते. यही वजह है चीनी भाषा न समझ पाने के चलते जवान वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना भी नहीं दे सकते कि आखिर किस उद्धेश्य से चीनी सैनिकों की घुसपैठ हई है. भारतीय सेना पहले से ही चीन सीमा में तैनात होने वाले कुछ जवानों को चीनी भाषा सिखाती है.

 

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