चीन से युद्ध हुआ तो बॉर्डर तक नहीं जा पाएंगी बोफोर्स, हॉवित्जर्स: CAG

क्या आप सोच सकते हैं कि चीन से लगने वाली सामरिक सड़कें मिलिट्री वाहनों (आर्टिलरी हॉवित्जर्स, बोफोर्स और मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम पिनाका और स्मर्च) का बोझ उठाने लायक नहीं हैं.

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चीन से लगी सामरिक सड़कों का निर्माण चीन से लगी सामरिक सड़कों का निर्माण

मंजीत नेगी / सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

क्या आप सोच सकते हैं कि चीन से लगने वाली सामरिक सड़कें मिलिट्री वाहनों (आर्टिलरी हॉवित्जर्स, बोफोर्स और मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम पिनाका और स्मर्च) का बोझ उठाने लायक नहीं हैं. संसद में पेश नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में 73 सड़कों में से 61 सड़कों के निर्माण के लिए कमजोर योजना, खराब कार्यान्वयन और वित्तीय अनियमितताओं की बात का खुलासा हुआ है. इन सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के पास है.

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कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति ने दो साल पहले सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण मानते हुए जिन 73 सड़कों को निर्माण के लिए चुना था, उनमें से अब तक 22 से 23 को ही पूरी तरह तैयार किया जा सका है. इन सभी रूट्स का निर्माण सरकार की ओर से 2016 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.

सीएजी ने संसद में पेश की रिपोर्ट
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रणनीतिक तौर पर संवेदनशील इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर ना होने या कमजोर ढांचे के चलते सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमता कमजोर होती है. रिपोर्ट के मुताबिक 61 सड़कों के निर्माण के लिए मंजूर किए गए 4,644 करोड़ रुपये में से 4,536 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. लेकिन अब तक सिर्फ 707 किलोमीटर लंबी 22 सड़कों का ही निर्माण किया जा सका है.

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वास्तविक सीमा रेखा के पास भारत का इन्फ्रास्ट्रक्चर
लगती 4,057 किलोमीटर लंबी वास्तविक सीमा रेखा के पास भारत अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर कुछ हद तक विकसित कर पाया है. हालांकि इसके बाद भी जमीन पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत मजबूत नहीं हो सका.

सड़क निर्माण में तकनीकी खामी
सीएजी ने चीन से लगने वाली सामरिक में समय रहते तुरंत कार्रवाई की बात कही है. इसके साथ ही इस घपले की जिम्मेदारी तय करने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी की जानी चाहिए, जिससे दोषी अधिकरियों की जिम्मेदारी तय हो और सड़क निर्माण में तकनीकी खामी का भी पता लगाया जा सके.

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