बाड़मेर: दलित युवक की मौत से हड़कंप, SP-सर्कल अधिकारी को पद से हटाया

25 वर्षीय दलित युवक की मौत से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. इससे पहले आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया था और पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर किया था.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • बाड़मेर,
  • 28 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 11:33 PM IST

  • दलित युवक की मौत से पुलिस महकमे में हड़कंप
  • SP और एक सर्कल अधिकारी को पद से हटाया

कानून व्यवस्था को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. वहीं अब गुरुवार को राजस्थान के बाड़मेर में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत को लेकर बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक (SP) शरद चौधरी और एक सर्कल अधिकारी को उनके पदों से हटा दिया गया है.

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25 वर्षीय दलित युवक की मौत से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. इससे पहले आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया था और पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर किया था. राजस्थान विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने शून्यकाल के दौरान सदन को सूचित किया कि स्क्रैप डीलर जीतू के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, जिसे पुलिस ने बुधवार शाम को चोरी में शामिल होने के संदेह के आधार पर हिरासत में लिया था.

वहीं जीतू के परिवार का आरोप है कि उसे अवैध हिरासत में लिया गया और पीट-पीटकर मार डाला गया. धारीवाल ने कहा कि एसएचओ को निलंबित कर दिया गया और अन्य कर्मियों को थाने से हटा दिया गया है. वहीं न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि एडीजी (नागरिक अधिकार) और जोधपुर के आईजी बाड़मेर पहुंच गए हैं. एडिशनल एसपी, सीआईडी-सीबी के जरिए भी पूछताछ की जा रही है.

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विधानसभा में एक बयान देते हुए धारीवाल ने कहा कि पुलिस ने जीतू को इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए उठाया कि उसकी दुकान पर कुछ चोरी के पाइप उतारे गए थे. सीने में दर्द की शिकायत के बाद उसे बुधवार रात को पुलिस स्टेशन में रखा गया और अगले दिन जिला अस्पताल ले जाया गया. धारीवाल ने कहा, 'गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे उसे अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.'

कार्रवाई की गई

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बाड़मेर एसपी को एपीओ (आदेशों की प्रतीक्षा के बाद) का दर्जा दिया है और पुलिस मुख्यालय ने बाड़मेर सर्कल अधिकारी को हटा दिया है. उन्होंने कहा, 'उनके खिलाफ कार्रवाई की गई क्योंकि पीड़ित को बिना किसी प्राथमिकी के पुलिस स्टेशन में रखा गया था. आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला भी दर्ज किया गया और उचित कार्रवाई की जाएगी.'

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धारीवाल ने सदन को सूचित किया कि शव परीक्षण नहीं किया जा सका क्योंकि परिवार के सदस्य विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. परिवार के सदस्य मुआवजे की मांग, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे.

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मुआवजा की मांग

वहीं बीजेपी ने परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की. नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सरकार को एक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार अपना पोषण कर सके. बीजेपी के अन्य विधायकों ने भी इस मामले पर बात की, लेकिन स्पीकर सीपी जोशी ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी, जिसके कारण सदन में हंगामा हुआ. जिसके बाद विधायकों ने वेल पर धावा बोल दिया और अपनी सीटों पर लौटने से पहले कुछ मिनटों के लिए विरोध किया.

वहीं स्पीकर ने मंत्री से पूछा कि क्या सरकार के पास कस्टोडियल डेथ पीड़ितों के परिवारों को मानवीय आधार पर पैकेज देने के लिए कानून या प्रस्ताव लाने की योजना है. जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने मुआवजा दिया और एक मामले की परिस्थितियों के आधार पर अन्य उपाय किए.

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