सुखबीर बादल की फिसली जुबान, कहा- हिंदुस्तान रहे या न रहे, भाजपा के साथ रहेगा अकाली दल

भाजपा अध्यक्ष की हिदायत से अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल को भाजपा प्रेम याद आ गया और उन्होंने भाजपा को अकाली दल का बड़ा भाई बताते हुए यहां तक कह दिया कि अगर भारत का अस्तित्व ना भी रहे तो भी वह भाजपा के साथ रहेंगे.

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सुखबीर सिंह बादल सुखबीर सिंह बादल

परमीता शर्मा / मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 19 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भाजपा प्रेम में कुछ इस तरह से डूबे नजर आए कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि हिंदुस्तान रहे या ना रहे लेकिन अकाली दल भाजपा के साथ रहेगा. यह मामला रविवार का है, जब पंजाब भाजपा प्रमुख विजय सांपला ने अकाली दल और भाजपा द्वारा जालंधर में आयोजित 'बजाओ ढोल खोलो पोल' रैली को संबोधित करते हुए अचानक अपने सहयोगी दल को ये हिदायत दे डाली कि वह ये समझने की भूल ना करें कि भाजपा के पास जनाधार नहीं है.

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भाजपा अध्यक्ष की हिदायत से को भाजपा प्रेम याद आ गया और उन्होंने भाजपा को अकाली दल का बड़ा भाई बताते हुए यहां तक कह दिया कि अगर भारत का अस्तित्व ना भी रहे तो भी वह भाजपा के साथ रहेंगे. अकाली दल ने 'बजाओ ढोल खोलो पोल' रैली का आयोजन पंजाब कांग्रेस सरकार के एक साल के कार्यकाल की पोल खोलने के लिए किया था लेकिन सहयोगी भाजपा अध्यक्ष ने ही अकाली दल की पोल खोल दी.

उसके बाद सुखबीर बादल ने कहा कि 'भारतीय जनता पार्टी का दिल है, उनको भाजपा के साथ ही जीना और मरना है. भाजपा के साथ कोई रहे या न रहे, हिंदुस्तान रहे या ना रहे हम तो आपके साथ ही रहेंगे.' उनके इस बयान से विवाद खड़ा हो गया है. उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने सुखबीर बादल का बचाव करते हुए कहा कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, वह गलती से ऐसा बोल गए.

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अकाली दल ने भी कहा कि सुखबीर बादल की बात का व्यर्थ में बखेड़ा खड़ा किया जा रहा है जबकि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी. सुखबीर बादल की जुबान भले ही फिसल गई हो लेकिन देश में, खासकर हाल ही में जिस तरह पूर्वोत्तर में भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है उससे अब पंजाब के के हौसले भी बुलंद हैं.

यही कारण है कि पंजाब भाजपा अध्यक्ष ने भरे मंच से अकाली दल को जता दिया कि अब वह कम से कम जनाधार की बात ना ही करें. बता दें कि पंजाब में भाजपा का वोट बैंक अकाली दल की तुलना में काफी कम है इसलिए भाजपा ने अकाली दल के साथ गठबंधन किया था.

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