'सतलुज' फिल्म पर बंटी पंजाब बीजेपी, '25000 मौतों' के दावे पर रवनीत सिंह बिट्टू ने मांगे सबूत, दूसरे नेताओं के अलग सुर

पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद के दौर को लेकर बनी फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बयान ने बीजेपी की प्रदेश इकाई में मतभेद उजागर कर दिए हैं. बिट्टू ने फिल्म में दिखाए गए 25 हजार अवैध अंतिम संस्कार के दावे की जांच और तथ्यों के सत्यापन की मांग की है, जबकि पार्टी के अन्य नेताओं ने अलग रुख अपनाया है.

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पंजाब में उग्रवाद के दौर को लेकर बनी फिल्म 'सतलुज' पर बीजेपी की प्रदेश इकाई में नेताओं की राय बंटी हुई है. (Photo: X) पंजाब में उग्रवाद के दौर को लेकर बनी फिल्म 'सतलुज' पर बीजेपी की प्रदेश इकाई में नेताओं की राय बंटी हुई है. (Photo: X)

अमन भारद्वाज

  • चंडीगढ़,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:29 AM IST

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के लगातार दिए जा रहे बयानों ने पंजाब बीजेपी के भीतर मतभेदों को सामने ला दिया है. पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद के दौर को लेकर पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर दिखाई दे रहे हैं. नई दिल्ली स्थित रेल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रवनीत बिट्टू ने कहा कि उन्हें जसवंत सिंह खालड़ा पर फिल्म बनने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसमें दिखाए गए तथ्यों की सत्यता सुनिश्चित होनी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि ओटीटी के दौर में सरकारें किसी फिल्म को पूरी तरह नहीं रोक सकतीं, लेकिन फिल्म में किए गए दावों, खासकर 25 हजार अवैध अंतिम संस्कार (Illegal Cremations) के आंकड़े की जांच होनी चाहिए. बिट्टू ने मांग की कि पंजाब में उग्रवाद के दौर में मारे गए पुलिसकर्मियों, आम नागरिकों, हिंदुओं, सिखों और आतंकियों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए एक आयोग बनाया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से होने वाली अरदास में केवल एक वर्ग के लोगों को नहीं, बल्कि संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी पुलिसकर्मियों, हिंदुओं, सिखों और अन्य पीड़ितों को भी याद किया जाना चाहिए.

बीजेपी के भीतर ही अलग-अलग राय

इससे पहले भी बिट्टू फिल्म में दिखाए गए 25 हजार अज्ञात शवों के दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मांग चुके हैं. उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि इस दावे के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, बिट्टू के इस रुख को उनकी अपनी पार्टी के सभी नेताओं का समर्थन नहीं मिला. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ बीजेपी नेता इकबाल सिंह लालपुरा ने सार्वजनिक रूप से बिट्टू के बयान से असहमति जताई. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.

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लालपुरा ने कहा कि 25 हजार शवों का आंकड़ा स्वयं जसवंत सिंह खालड़ा ने उठाया था और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी इस मामले की जांच कर चुका है. उन्होंने कहा कि हर बात की एक सीमा होती है. वहीं, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का रुख भी अलग रहा. उन्होंने कहा कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है. साथ ही उन्होंने कहा कि सच दिखाने में कोई बुराई नहीं है.

मामले से बिट्टू का रहा है निजी जुड़ाव

रवनीत सिंह बिट्टू का इस मुद्दे से व्यक्तिगत जुड़ाव भी है. वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में आत्मघाती बम हमले में हत्या कर दी गई थी. फिल्म 'सतलुज' में बेअंत सिंह की हत्या की घटना को भी दिखाया गया है और इस दृश्य में 'गगन दमामा बाजियो' शबद का इस्तेमाल किया गया है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल होने से पहले बिट्टू कांग्रेस सांसद थे. वह लंबे समय से पंजाब में उग्रवाद और खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ मुखर रहे हैं और उन्हें कई बार खालिस्तान समर्थक तत्वों से धमकियां भी मिल चुकी हैं.

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बिट्टू ने दिलजीत पर भी साधा निशाना

रवनीत सिंह बिट्टू ने अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की भी आलोचना करते हुए कहा था कि उनके अभिनय वाली फिल्म 'सतलुज' पंजाब के इतिहास का केवल एक पक्ष दिखाती है. बिट्टू के मुताबिक, इस फिल्म में उन पुलिसकर्मियों, राजनीतिक नेताओं और आम नागरिकों के बलिदान को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया, जिन्होंने उग्रवाद के दौर में अपनी जान गंवाई. बता दें कि इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है.

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बीजेपी के लिए संतुलन साधने की चुनौती

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेपी पंजाब में 1984 से 1995 के दौर को लेकर राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. हाल ही में अमृतसर स्थित दमदमी टकसाल के एक कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए लोगों को शहीद बताया था. इसे सिख समुदाय की भावनाओं से जुड़ने की कोशिश माना गया, जबकि दूसरी ओर पार्टी उग्रवाद के खिलाफ राज्य की कार्रवाई का भी समर्थन करती रही है. बीजेपी ने 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है. 

हालांकि, 2020 के किसान आंदोलन के बाद पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी के लिए राजनीतिक आधार मजबूत करना आसान नहीं माना जा रहा. ऐसे में रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक असहजता खड़ी कर दी है. पंजाब के उग्रवाद के दौर को लेकर बीजेपी के भीतर सामने आए अलग-अलग रुख ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पार्टी अतीत के इस संवेदनशील अध्याय पर किस तरह का आधिकारिक राजनीतिक संदेश देना चाहती है.

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